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Old April 21st, 2011, 12:04 PM
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Re: “Naari”- Bhramar-Hindi kavita (Hindi poem).

जला हुआ घर आग निकलती
भैरव राग सुनाऊँ
मै दुनिया को जगा रहा हूँ
मेरे घर सब सोते
गली बुहारूं मै दुनिया की
घर सब- कूड़े में सोते
भाई मेरा पी कर आता
बम -बम -बम -बम भोले
गा के -आधी रात जगाता
बीबी को फटकार कभी तो
माँ बापू का गला दबाता
लक्ष्मी गृह की -गृह क्लेश से
सहमी भूखी सोती
कितने सुन्दर प्यारे बच्चे
डर के सहमे सोते
वो क्या जानें प्यार क्या होता
धूल लपेटे-रोते
गवर्नमेंट अपनी सब देती
घर -राशन बिजली अरु पानी
खाना भी स्कूल पठाती
पर बच्चो को ना ला पाती
मेरा गुस्सा अपने भाई
अपनी बीबी पर आता
लिखता पढता मै समझाता
कुत्ते सा भूंके मै जाता
बहरे कान न गाना सुनते
पोथी मेरी देते फेंक
कहते ‘घर’ है ‘जला’ जा रहा
मस्ती 'कवि' तुझको है आई
कहें भ्रमर क्या गला दबा दें
जिनके कारण- ‘आग’ लगी है
पुलिस -जेल या फिर भिजवा दें
भाई’ है लेकिन मेरा वो
"माँ" तो मेरे बीच खड़ी है
लिखते पढ़ते हार थका मै
‘माँ ‘की गोद में जा सो जाता
‘माँ’ को ‘आँख’ दिखाता जब वो
‘होश गवां’ जब जब चिल्लाता
तब ‘भूखा मै’ जाग-जाग कर
फिर कुछ लिखने को आ जाता
मेरी बीबी बहुत ‘सुघड़’ है
मधुर -मधुर समझाती
दिन भर-भोली-फुलवारी को
अपने रहे सजाती !!
कहती लिख दे सोहर-कजरी
पुस्तक में छपवाए
नाम के साथ तुम्हारे सजना
दो पैसे भी आये
हाथ पकड़ने जब जाऊं मै
झटक के बस है रोती

अच्छी बातें बोल बोलकर
घूमूँ ईमां -धर्म- राग मै गाऊं
डरता हूँ इस पागल दुनिया में
घूम घूम मै
पागल -ना बन जाऊं
लोग आज लिए पत्थर हैं
हाथ उठाये घूमें
किस पर भाई करूँ भरोसा
मजनू सा ना मै फंस जाऊं

तुम्ही बता दो
दिल गर तेरे
कुछ धड़कन है बाकी
अच्छा क्या ?? और कौन बुरा है??
कौन राह पकडूँ मै जाऊं
अंधियारे की राह -दिखा-ना
खायीं में गिर जाऊं !!

जला हुआ घर आग निकलती
भैरव राग सुनाऊँ !!
या सुधरें -भाई -सब मेरे
या चुल्लू भर गंगा पानी
डूब मरूं -तर जाऊं .

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५
९.४.२०११
__________________
‘दादी’ –‘माँ’ -सपने ना मुझको
सच की तू तावीज बंधा दे
हंसती रह तू दादी अम्मा
आँचल सर पर मेरे डाले
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