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Old July 16th, 2013, 11:46 AM
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Re: Gita slokas in hindi

Here is reply to your second part.


भोजन के समय ध्यान
हम रोज भोजन करते हैं। कुछ लोग जीने के लिए खाते हैं, तो कुछ अपनी जिह्वा को तृप्त करने के लिए खाते हैं। यदि हम विचार करें, तो पाएंगे कि यह भी ध्यान का माध्यम बन सकता है। इधर-उधर भटक रहे मन को समेटकर जब एक स्थान पर केंद्रित किया जाता है, तभी हम ध्यान की अवस्था में जा पाते हैं। ठीक उसी तरह खाते वक्त यदि दिमाग को अन्य समस्याओं में उलझाने की बजाय हम सीधे आहार पर केंद्रित करते हैं, तो न केवल हमें स्वाद, बल्कि आत्मसंतुष्टि भी मिलती है। वेद में कहा गया है-

अन्नं ब्रह्मा रासो विष्णु पक्तो देवो महेश्वर:।
इवं ज्नत्वा तू यो भुंक्ते अन्न दोषो न लिप्यते


यानी ब्रह्मा हमें अन्न देते हैं, विष्णु स्वाद लेने की क्षमता देते हैं और शिव इसे पचाने में हमारी मदद करते हैं। जब हम इस ज्ञान के साथ भोजन करते हैं, तो यह रोगरहित होता है। इसलिए आप जब भी भोजन करें, तो आदर भाव के साथ इधर-उधर से दिमाग हटाकर सिर्फ उसी पर ध्यान केंद्रित करें। आप देखेंगे कि भोजन करना आपके लिए प्रार्थना के समान बन गया है। ओशो राजयोग मेडिटेशन सेंटर की मां प्रेम नयना बताती हैं कि भोजन करते समय भी आप ध्यान में जा सकते हैं। ओशो के अनुसार, आप जो भी क्रिया करें, उसमें पूरी तरह समर्पित हो जाएं। सचेत हो जाएं। बिना सचेत हुए किसी भी कार्य को सौ प्रतिशत सफल नहीं बनाया जा सकता।

जब भोजन करें, तो आपका ध्यान थाली और उसकी सामग्रियों पर ही हो। आनंदित होकर या रस लेकर भोजन करें। आप पाएंगे कि आपका शरीर, दिमाग और आत्मा तीनों एक लय-ताल में आ गए हैं। तीनों में एक गहरा रिदम स्थापित हो गया है। यदि आप ध्यान केंद्रित कर कोई भी काम करते हैं, तो भोजन लेना, कुएं से पानी निकालना, टहलना, लकड़ी तोड़ना और भोजन पकाना भी ध्यान का माध्यम बन सकता है।

भोजन करना ध्यान का सबसे सरल तरीका है। इसमें शर्त बस इतनी है कि आप चैतन्य होकर इसे आजमाएं। इस विधि की खोज बौद्ध समुदाय ने की थी, जिसे बहुत बाद में पश्चिम में यहूदी समुदाय ने अपनाया। जे. माइकेलसन ने अपनी किताब 'गॉड इन योर बॉडी' में 'इटिंग मेडिटेशन' के कुछ तरीके बताए हैं। आप इन्हें प्रयोग में ला सकते हैं।

भोजन करने वाली जगह के आसपास का वातावरण शांत हो। आप रिलैक्स होकर डाइनिंग टेबल या जमीन पर बैठकर भी खाना खा सकते हैं। कुर्सी पर बैठने पर दोनों पैर समानांतर और जमीन पर होने चाहिए।
किसी भी प्रकार के भोजन से आप शुरुआत कर सकते हैं। यह सब्जी या फल का एक टुकड़ा भी हो सकता है।
सबसे पहले दिल से सोचें कि क्या आप भूखे हैं? या सिर्फ दिनचर्या के तहत भोजन कर रहे हैं? यदि आप सचमुच भूखे हैं, तभी यह क्रिया लाभदायक होगी।
भोजन को अपनी उंगलियों से स्पर्श करें और इसके स्वरूप के बारे में सोचें। इसकी गंध और स्वाद को भी महसूस करें।
भोजन की जो थाली आपके सामने है, उसमें स्थित अन्न को तैयार करने वाले किसान, दुकान तक पहुंचाने वाले ट्रक-ड्राइवर, दुकानदार, भोजन पकाने वाले आदि के अथक परिश्रम के बारे में सोचें।
सूक्ष्म स्तर पर अन्न के दाने को तैयार करने वाले चारों तत्व सूर्य, जल, मिट्टी, हवा के साथ-साथ अन्न देने वाले पौधे के बारे में भी विचार करें।
अब भोजन को मुंह में डालें। चबाने और निगलने से पहले जीभ को इसका स्वाद लेने दें। आप पाएंगे कि इसका स्वाद अनोखा है। इस दौरान अपनी आंखें बंद रखें और मुंह में होने वाली हलचल पर ध्यान केंद्रित करें।
भोजन को चबाना शुरू करें। इस समय दिमाग को वहीं पर केंद्रित रखें।
15 से 20 बार चबाने की कोशिश करें। दस से अधिक बार चबाने के बाद आपको एक अनोखा स्वाद मिलेगा। भोजन निगलने के बाद आहार नली से गुजरते समय भी आप इसे महसूस करते रहेंगे। यही क्रम आगे भी बनाए रखें।
आपके पास दिन के कई घंटे हैं। इसमें से एक घंटा चैतन्य रूप से भोजन करने के लिए निकाला जा सकता है। शुरुआत में आप भोजन के पहले कौर पर ही सिर्फ पांच मिनट तक यह प्रयोग कर सकते हैं। धीरे-धीरे यह अवधि बढ़ाई जा सकती है।
कुछ ही दिनों बाद आप फर्क महसूस
करने लगेंगे।

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Whenever you think that you are arguing with a fool, you must make sure that he is not doing the same.
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