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  #61  
Old March 11th, 2011, 03:35 AM
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Re: “पगली ” मेरा-" मन"-"मोहन" -कहीं खो गया ..–shuklabhramar5–हिंद

मेरा-" मन" - "मोहन" - कहीं खो गया ..
"मन" - "मोहन" था कितना प्यारा
आँख का तारा
माँ का अपनी - राज - दुलारा
सीने सेलिपटाये रहती
आँचल सदा छिपाएरहती
"राम" हैं क्या और क्या "रामायण"
चार बजे - भिनसारे उठकर
चक्की - पीसे - गाये रोज
सुनाया करती
' बेसन ' - रोटी जौ का सतुआ
मक्खन -घी संग - बथुआ साग
खिलाया करती
नया नया सुरमा ला ला के
टीका - काजल लाया करती
"आँख" तेज हो -जिससे उसकी
दूर -दृष्टि हो
कभी - कभी अंधियारे ले जा
दीपक एक जलाया करती
‘जोग’-‘योग’ सिखलाया करती
बहुत रौशनी - चकाचौंध से -
बच के रहना
"शोर"- भीड़ से
दूर रहे तुम
शीतल करना
हाथ में "गंगा -जल" देकर के
पीपल-नीम - दिखाया करती !!
"रोज" सींचना -
"रोज" चढ़ाना
जल ये "पावन"
"पेड़" - सूखता
ये जो आधा -"मरा"-
"राम" है - पूजो इसको
धर्म यही - "ईमान" यही है
इसका फल "कड़वा" होता था
"कुछ ने आग -लगा डाला था
नहीं आज - फल - इतना देता
मीठा - मीठा नहीं दीखता
कोई भूखा
तृप्त अगर तो
सपनो के संग - कपडे बुनते
ना - "नंगा" कुछ
कहीं दीखता !!
कान पकड़कर -"मन" - "मोहन" को
क्या -क्या "पाठ"
पढाया करती !!!
रोज - अखाड़े -भेज-भेज कर
"पहलवान" कर डाला
"ताकतवर"
इस दंगल से -उस दंगल-
घूम - घूम - वो "फंसता"जाता
' बड़ा" - अखाडा -बहुत ' दाँव" थे
बहुत खिलाडी -धृष्ट - दुष्ट भी
"उसको" -रोज "लड़ाया" करते
"आँख" में -पट्टी उसके बांधे
क्या - क्या रोज सिखाया करते ???
उसे सामने - ला - ला
"धंधा" अपना - रोज चलाया करते !!!

सारे दाँव बिना सीखे वो
"आज"- "पटखनी" खाता जाता
"मन"-"मोहन" था कितना प्यारा !!!
माँ अब भी है - इतनी प्यारी
भाई- "उसके"- "बहुत" खड़े हैं
"हाथ" बड़े हैं - "स्वागत" तत्पर
ना जाने क्यों ??? वो "गूंगा" बन
बात - भेद कुछ कह ना पाता
"खोता " - जाता -
"माँ" रोती है -खून के आँसू
कहती घूमे "पगली" जैसे
सब को -मेरा
मेरा - "मन" - "मोहन" - कहीं खो गया !!!
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‘दादी’ –‘माँ’ -सपने ना मुझको
सच की तू तावीज बंधा दे
हंसती रह तू दादी अम्मा
आँचल सर पर मेरे डाले

Last edited by shuklabhramar5; March 11th, 2011 at 03:42 AM.
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  #62  
Old March 13th, 2011, 06:46 AM
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Thumbs up Re: Patang"हीरा"-कंचन -कांच सब इस हार में जड़ा हैं –shuklabhramar

"हीरा"-कंचन -कांच सब इस हार में जड़ा हैं

ये दुनिया एक
स्कूल है - मंच है
पाठशाला है -तराशने का हीरा
बड़ा-कारखाना है

जोश भरो -अभी चढो
खोज करो -"सांस" -अभी -
बाकी है -बहुत कुछ
ढूँढना -खोजना
तलाश करना
अँधेरे में -आकाश गंगा में
"बरमूडा" के "ट्रैंगल" में
जिसमे कितने "हम"
डूब गए !!!
तुम क्या हो ??
एक बिंदु ? हो 'विलीन'
सागर में !!
अथाह जल में
डूबो -उतराओ -
छलाँग लगाओ
चाँद -सूरज को पास लाओ

हंसो हंसाओ -"जोकर" सा
जीवन भर -रौशनी बांटो
माँ की गोद -आँचल जो सीखा-
"दुलार"- "करो"
गुण -ढंग -लाज -हया
संस्कृति हमारी -
का -खुलकर -प्रचार करो
"मंच" पर चढ़ जाओ
"शिखर" पर चढ़ - "आओ" -
"झंडा"गाड़े -अपने
प्यारे 'स्कूल" में -अपने "वजूद" में
लौट आओ
जहाँ -कोई -छोटा न
कोई बड़ा है -
"-हीरा"-कंचन-कांच सब
इस हार में जड़ा है
हम बच्चे -
ये एक गुरु है
खड़िया और स्याही से
"आँक" -जान फूंकने का
इसमें जुनू है !!!

थोडा सा 'झुक" जाओ
तरुवर बन फल लदा
नमन करो हाथजोड़ -
समीकरण साधने का
याद रखो -गणित -"जोड़"-
जोड़ - तोड़ !!
दशमलव से -'शून्य" अभी -
सफ़र -बाकी है
सूरज के पार तक
मन की उड़ान तक !!!

सुरेन्द्रशुक्लाभ्रमर५
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  #63  
Old March 27th, 2011, 04:10 AM
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Thumbs up Re: “घाव ” बना नासूर आँखें खोल राह में चल दो-भ्रम&a


आँखें खोल राह में चल दो
सपने दिन के
तारे दिन के
नहीं सभी सब सच्चे होते
फर्जीवाड़ा बहुत बढा है
लूट पाट करने वालों ने
खूब गढ़ा है
महल दुमहले
संगी साथी
जैसे सागर तीरे कोई बना
इतराता जाये
सुन्दर सुन्दर ताजमहल
हो - बना रेत का
बिना नीव का
कुछ पल तो
आँखों को भाए
जबतक कोई लहर आये
हहर हहर कर
किसी ह्रदय से
बडवाग्नि से
सोख न जाये
सावधान हो मृग मरीचिका
से बढ़ जाओ
मत घबराओ
रहो जागते
इनसे जिनको
आँख बंद कर
रहे पूजते

इन सबको हे मेरे भाई
हम सब ने ही
दूध पिलाकर किया बड़ा है

Surendrashuklabhramar5

26.3.2011
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सच की तू तावीज बंधा दे
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Last edited by shuklabhramar5; March 27th, 2011 at 04:14 AM. Reason: space
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  #64  
Old March 29th, 2011, 10:17 AM
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Re: “घाव ” बना नासूर गुल गुलशन सब खिले-भ्रमर -हिं&#

सराबोर कर दो हर मन को
अगली होली यार
सभी रंग घुल जाएँ ऐसे
एक धराहो
एक पृष्ठ हो
एक हमारे मन की आँखें
धर्म जाति व्यव्हार एक हो
गुलगुलशन सब खिले
मिलेंगे -अब
उस होली त्यौहार
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५
27.03.2011
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  #65  
Old March 30th, 2011, 07:18 AM
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Re: “घाव ” बना नासूर आओ 'होली' जल्दी आओ -जियरा जरा ज

[SIZE="6"]आओ 'होली' जल्दी आओ - जियरा जरा जुड़ाई-
“holi contest”

होली आई मेरे भाई बन - ठन के

रंगीली जैसे नारि हो .....
पिया के स्वागत तत्पर बैठी
छप्पन भोग बनाये
गुल - गुलाल हर फूल बटोरे
छन - छन सेज संवारे
[font=mangal] घूंघट[ /font] उठा उठा केताके
घर आँगन क्षन - क्षन में भागे
हवा बसंती - कोंपल- हरियाली
तन में आग लगाये
खिले हुए हर फूल वो सारे
मुस्काएं - बहुत - चिढ़ाएं
कोयल भी अब कूक- कूक कर
" कारी " - करती जाये
सुबह ' बंडेरी ' - ' कागा' बोले
' नथुनी ' हिल -हिल जाये
होंठों को फिर चूमि - चूमि के
दिल में आग लगाये
कहे सजन चल पड़े तिहारे
जागे - गोरी ' भाग ' रे
आँगन तुलसी खिल - खिल जाये
हरियाली ' पोर ' - ' पोर ' में छाये
रंग - बिरंगी तितली जैसी
भौंरो को ललचाये
रंग गुलाल से डर- डर मनवा
छुई - मुई हो जाये
पवन सरीखी - पुरवाई सी
गोरी उड़ - उड़ जाये
चूड़ी छनक - छनक ' रंगीली '-
होली याद दिलाये
सराबोर कब मनवा होगा
मोर सरीखा नाचे
पपीहा - पिया - पिया तडपाये
बदरा उडि - उडि गए " कारगिल "
" काश्मीर "-" लद्दाख "
गोरिया विरहा -" रैना " मारी
भटके कोई सागर तीरे
कोई कन्या - कुमारी
बंडवा - नल -' सुख' -' सोख ' ले रहा
फूल रहा - कुम्हिलाई
आओ ' होली ' जल्दी आओ
कान्हा को लई आओ
सावन के बदरा [font=mangal] से[ /font] बरसो
जियरा जरा जुडाई

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रम र
३०..२०११
[/size]

'लाल' नहीं पाया ना 'प्याला'


( photo with thanks from google/net)
मधुशाला में मधु है उसकी
चोली दामन साथ निभाती
दिल की हाल बयाँ करते हैं
चार यार संग बन बाराती
----------------------------
कभी हँसे 'कद' रोया करदे
नाच झूम मन की सब कह्दे
दर्द-दवा-है वैद्य वहीं सब
अपनी कहदे उनदी सुनदे
---------------------------------
एक 'कमाई'- बेंच के लाता
चार मौज मस्ती रत रहते
कहीं कोई खाली जो आता
कभी धुनाई गिर पड़ खाता
---------------------------------
एक-एक पैग जो अंदर जाते
भाव भरे हर व्यथा सुनाते
सच्चा इंसा हूँ मै यारों
'पागल' दुनिया घर फिर आते
----------------------------
बात-बात में बने बतंगड़
धक्का-मुक्की दिन या रात
कभी ईंट तो मारें कंकड़
गली मोहल्ला ज्यों बारात
--------------------------------
'छज्जू' के हैं छह-छह कुड़ियां
दिखती सारी प्यारी गुड़िया
जाने कौन कर्म ले आयीं
प्रेम में रत या जहर की पुड़िया ?
--------------------------------
'कुछ' कहती ये बड़ा शराबी
'पी' लेता तो बड़ी खराबी
'लाल' नहीं पाया ना 'प्याला'
समझो ना फिर -इसको घरवाला
-----------------------------------
बद अच्छा बदनाम बुरा है
किया हुआ हर काम बुरा है
'सच्चाई ' दबती फिर जाती
गली मोहल्ले 'वही' शराबी ....
----------------------------
दुश्मन पागल, आवारा सा चीखे
लट्ठ लिए पागल सा घूमे
कभी किसी की चोटी खींचे
मार के रोता आँखें मींचे
--------------------------------
मै ना कोई शराबी यारा
'बदचलनी ' के गम का मारा
भटकी बीबी कुड़ियां जातीं
नाक है कटती शर्म है आती
-------------------------------
'यार' बड़े उनके हैं सारे
आँख दिखा मुझको धमकाते
रोता दिल 'नासूर' अंग है
काट सकूं ना -ना-पसंद हैं
-----------------------------------
माँ की सहमति से बालाएं
सजधज मेकअप जाएँ-आयें
'पप्पा' को मिटटी बुत समझें
चैटिंग पूरा दिवस बिताएं
-------------------------------
उस दिन पुलिस बुलायी थी तू
बैठक दंड कराये खुश थी
आज बनाऊंगा मै मुर्गी
याद रखेगी जीवन भर तू
-----------------------------
'छज्जू' बोला आज हे मुई
मर जाऊंगा 'धर' तारां ( बिजली) मै
रोज-रोज मरता है क्यों भय
मर जा -जा मर तंग मै हुयी
-------------------------------
लिए लट्ठ छत के ऊपर वो
गया थामने 'बिजली' दामन
चीख पुकार शोर रोना 'हुण'
लाठी ईंटों की फिर वो धुन
----------------------------
पापा ! मम्मी ! , रोती कुड़ियां
सच्ची-प्यारी- मार भी खाईं
हंसी व्यस्त कुछ कथा सुनाती
मै सच्ची हूँ , अजब ये दुनिया ....
---------------------------------
हुआ इकठ्ठा रात मोहल्ला
'गबरू' कुछ फिर चढ़े बढे घर
'छज्जू' भागा कूद-फांदकर
कान पड़ी जब पुलिस-पुलिस तब
-------------------------------
कौन है सच्चा कौन है झूठा ?
दया रहम दोनों पर आती
'रोजगार' ना कभी 'गरीबी'
'इन्हे' इसी मन्जिल पहुंचाती
---------------------------
'सपनों' में जीने की खातिर
कभी दिखावा -'पेट' की खातिर
लता-बेल 'कांटे' चढ़ जातीं
या दल-दल में फंसती जातीं
----------------------------
पति-पत्नी का कैसा रिश्ता ??
मिले 'लाल' ही है मन मिलता
तन-मन प्रेम सभी का हिस्सा
नहीं प्रेम कल का बस किस्सा
--------------------------------
अपराधी हैं ताक में रहते
बिगड़े सब, 'कुछ' तो बिक जाए
कौड़ी भाव में 'स्वर्ण' मिले तो
निज दूकान तो सजती जाए
---------------------------------
दोस्त शराबी के फिर आते
'साहस' दे गृह फिर दे जाते
'माँ' कहती हे! पास पडोसी
ना जाओ ना फिर 'वे' आते
-----------------------------
बुलबुल कहाँ कैद रह पाएं
खोलो पिजड़ा फिर -फिर आयें
रहें कहाँ ना साथी पाएं
निज करनी हैं पर कतराए
----------------------------
'रब' हे ! ऐसे दिन ना लाओ
शांति रहे, मन -मंदिर सुन्दर
प्रेम-पूज्य मूरति सीता-शुभ
राम 'परीक्षा-अग्नि' न भाओ
--------------------------------
सत्कर्मों से मिला सुघड़ तन
नरक वास हे! क्यों मन लाते
मनुज प्रेम 'मानव' निज तन कर
मृग मरीचिका क्यों भरमाते ??
-----------------------------------
( एक आँखों देखी सच्ची व्यथा कथा पर आधारित, प्रयुक्त सभी नाम काल्पनिक हैं और किसी के जीवन से कोई सम्बन्ध नहीं हैं , कुछ शब्द पंजाबी के प्रयुक्त हैं )
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर'५
२०-०२.२०१४ करतारपुर जालंधर पंजाब
१०-३०-११.१५ मध्याह्न
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Last edited by shuklabhramar5; April 10th, 2014 at 07:46 AM. Reason: space congestion
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  #66  
Old April 11th, 2011, 03:14 PM
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Re: “घाव ” बना नासूर -भ्रमर -हिंदी पोएम

Thanx swami ji and premi ji
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Last edited by shuklabhramar5; April 11th, 2011 at 03:52 PM.
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  #67  
Old April 11th, 2011, 03:18 PM
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Re: “घाव ” बना नासूर -भ्रमर -हिंदी पोएम

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Originally Posted by shuklabhramar5 View Post
my one thread in hindi section

title - pagli is disappeared ??????

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Bhramar bhai, can't hear you... zara zor se boliye...
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.
March 16, 2012: Sachin Tendulkar scores his 100th century in Inter-fucking-national cricket

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  #68  
Old April 11th, 2011, 03:19 PM
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Re: “घाव ” बना नासूर -भ्रमर -हिंदी पोएम

One more time you try using big fonts and I ban you
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Originally Posted by shuklabhramar5 View Post
my one thread in hindi section

title - pagli is disappeared ??????

Views-615
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There are four kinds of people to avoid in the world: the assholes, the asswipes, the ass-kissers, and those that just will shit all over you.
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  #69  
Old April 11th, 2011, 03:25 PM
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Re: “घाव ” बना नासूर -भ्रमर -हिंदी पोएम

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Originally Posted by swami View Post
one more time you try using big fonts and i ban you
swami ji never , instead i was advised that for hindi poems use big and bold fonts ..

I hv not got my que answer
whr gone my one thread pagli ???
Moderating ??

Pls...
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Old April 11th, 2011, 03:29 PM
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Re: “घाव ” बना नासूर -भ्रमर -हिंदी पोएम

Quote:
Originally Posted by shuklabhramar5 View Post
swami ji never , instead i was advised that for hindi poems use big and bold fonts ..

I hv not got my que answer
whr gone my one thread pagli ???
Moderating ??

Pls...
http://www.echarcha.com/forum/showthread.php?t=37674

Here is your thread,just go to your user profile and see the threads started by you
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  #71  
Old April 11th, 2011, 03:32 PM
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Re: “घाव ” बना नासूर -भ्रमर -हिंदी पोएम

Quote:
Originally Posted by swami View Post
http://www.echarcha.com/forum/showthread.php?t=37674

here is your thread,just go to your user profile and see the threads started by you
there i could see but not coming in hindi section then wat is the use sir ???

Pls keep it where it was i mean in hindi section
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Re: Patang – hindi poem-bhramar.

Pls keep that thread also in hindi section

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Re: “घाव ” बना नासूर -भ्रमर -हिंदी पोएम

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Originally Posted by shuklabhramar5 View Post
there i could see but not coming in hindi section then wat is the use sir ???

Pls keep it where it was i mean in hindi section
When in the hindi section just change the display option to be seen from the begining and you would be able to see all the threads started from the begining.you could have asked someone about your thread rather then complaining using big fonts and bold letters.Dhamki na diya karo Shukla ji
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There are four kinds of people to avoid in the world: the assholes, the asswipes, the ass-kissers, and those that just will shit all over you.
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  #74  
Old April 11th, 2011, 03:40 PM
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Re: “घाव ” बना नासूर -भ्रमर -हिंदी पोएम

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Originally Posted by swami View Post
When in the hindi section just change the display option to be seen from the begining and you would be able to see all the threads started from the begining.you could have asked someone about your thread rather then complaining using big fonts and bold letters.Dhamki na diya karo Shukla ji
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Originally Posted by shuklabhramar5 View Post
swami ji never , instead i was advised that for hindi poems use big and bold fonts ..

I hv not got my que answer
whr gone my one thread pagli ???
Moderating ??

Pls...

shukla ji here is the way to see all the thread in the hindi forum-section.

and swami ...its okay... he got panicked thinking somebody hijacked his thread ...its okay... natural reaction from a artist. let it go.

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  #75  
Old April 11th, 2011, 03:41 PM
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Re: Patang – hindi poem-bhramar.

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Originally Posted by shuklabhramar5 View Post
Pls keep that thread also in hindi section

pagli - having 615 views

dont panic shukla ji everything is there... just see the ghaav thread I explained with screenshot.

its okay... stuff happens..
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koyla-sookhi roti, naari, pagli, patang


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