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View Poll Results: who may be the killer of aarushi
talwar 3 100.00%
nupur 0 0%
krishna 0 0%
hemraj 0 0%
Voters: 3. You may not vote on this poll

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  #1  
Old February 12th, 2011, 09:25 AM
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Thumbs up “ Koyla”- Bhramar –Hindi poem

छोरी छोरवन क अजब धमाल है कान्हा की कारगुजारी।
---------------------------------------

आज उड़त अबीर गुलाल
छोरी छोरवन क अजब धमाल
है कान्हा की कारगुजारी। …
=================
मिटटी लेप किये कोई कजरा लगाये
बनरे लाल मुख धारी कोई लंगूर आये
कुर्ता टोपी रंगे कोई कपड़ा भी फाड़े
छोटी बड़ी पिचकारी रंग मारे बौछारें
ढोल मजीरा कोई पीटे है ताली
है कान्हा की कारगुजारी। … —–
आज उड़त अबीर गुलाल
छोरी छोरवन क अजब धमाल
है कान्हा की कारगुजारी। …

===========================
काला मुख लिए मोतियन सी आँखें
राधा गोपियन की टोली है राह में ताके
तिरिया चक्कर से बच चलो झांके
कान्हा ग्वालों की अटकी रे साँसें
लिए लट्ठ गजब की ये होरी
है राधा की कारगुजारी। ……………।
आज उड़त अबीर गुलाल
छोरी छोरवन क अजब धमाल
है कान्हा की कारगुजारी। …
null
============================
लाल गाल वाली सभी हरी पीली रंगी
चोली घाँघरा चूनर है अजब सतरंगी
गायें फगुवा कड़क जैसे दामिनि
काली दुर्गा ये प्रेम रंगी कामिनि
अरी ! होली है या री कबड्डी। …
है राधा की कारगुजारी ———–
आज उड़त अबीर गुलाल
छोरी छोरवन क अजब धमाल
है कान्हा की कारगुजारी। …

=========================
खाये भंग पिए हैँ ठंडाई
ऋतु वासन्ती इनपे है छायी
प्रेम परवान जोड़ी बनि के आयी
कामदेव नजरों में खुमारी है छायी
इन्द्र दरबार परियाँ ज्यों आयीं —–
है कान्हा की कारगुजारी ———
आज उड़त अबीर गुलाल
छोरी छोरवन क अजब धमाल
है कान्हा की कारगुजारी। …
==========================
पहने साड़ी बने कान्हा नारी
सेंध लाये धरे राधा प्यारी
ह हा हि ही हुल्लड़ गायें होरी
चूर मस्ती गजब खेलें होरी
छलके रस-रास यादगार होरी
है कान्हा की कारगुजारी। ।
आज उड़त अबीर गुलाल
छोरी छोरवन क अजब धमाल
है कान्हा की कारगुजारी। …
===================
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर’५
प्रतापगढ़ भारत
१५. ०३. १४
१० से १०. २५
हरदोई -लखनऊ मार्ग
लौह पथ गामिनी में
==================


=======================================================
“ Koyla”- Bhramar –Hindi poem
Kya hans doon mai,
Hua “Koyla”
‘Koyal” naa hoon,
kook kook kar
tumhe rijhaun,
khud ko mai
jhuthlaun.

Pahle se hi ,
Jala hua hoon,
Kudrat ka hoon mara,
Maar jor ki
Lagi hamare,
‘Dagdh hriday par
abhi samhale,
bana nahi mai “Raakh,”
Berahmi duniya ki dekho,
Kuchh bhi n pahchan,
Apne swarth ki khatir,
Nit nit roj lagate”Aag”
Jalne se kuchh
Dard to hota,
Unko kya ahsaas.

Lakh chhipa do,
Mn to rota,
Kya jaane
Hansna kya hota,

Jinki khatir –
Jala-gaya mai,
Jeevan deta
Naa sochen vo ,pal-
Bhar bhayi,
Ant mera kuchh
Achchha hota.

Kabhi jalayen,
Kabhi bujha den,
“Roti apni Senke”
raakh huye bhi
gandi naali ya
naala he fenke.

Tukur tukur bs
Taake -jaun,
Naala jb ye
Bahta-jaata,
Badhta-jaata,
Us “Ganga” ki oar,
Jahan’ Bhagirath’
Ke purvaj sab,
‘tare’ huye the,
paaye the ek chhor.

Mera ‘TP’ bhi kya –
Kuchh kam hai??
Ganga tak to-
Jaun-shayad kal,
Fir banun aur kuchh-
Hans paaun-
aur hansaun.

6.34A.M. 12.2.11 Jal(PB).

----------------------------------------------------------------------------------------------

काहे खून तेरा प्यारे अब
खौलता नहीं ---??
तोड़ लिया कोई फूल तुम्हारा
खाली हो गयी क्यारी
उजड़ जा रहा चमन ये सारा
गुल गुलशन ये जान से प्यारी
खुश्बू तेरे मन जो बसती
मिटी जा रही सारी
पत्थर क्यों बन जाता मानव
देख देख के दृश्य ये सारे
खींच रहा जब -कोई साड़ी
काहे खून तेरा प्यारे अब
खौलता नहीं ---??
--------------------------
साँप हमारे घर में घुसते
अंधियारे क्यों भटक रहा
जिस बिल से ये चले आ रहे
दूध अभी भी चढ़ा रहा ?
तू माहिर है बच भी सकता
भोला तो अब भी भोला है
दोस्त बनाये घूम रहा
उनसे अब भी प्यार जो इतना
बिल के बाहर आग लगा
बिल में ही रह जाएँ !
काट न खाएं !
इन भोलों को !!
लाठी क्यों ना उठा रहा ??
काहे खून तेरा प्यारे अब
खौलता नहीं ---??
------------------------
तोड़-तोड़ के पत्थर दिन भर
बहा पसीना लाता
धुएं में आँखें नीर बहाए
आधा पका - बनाता
बच्चों को ही पहले देने
पत्तल जभी सजाता
मंडराते कुछ गिद्ध -बाज है
छीन झपट ले जाते
कल के सपने देख देख के
चुप क्यों तू रह जाता
काहे खून तेरा प्यारे अब
खौलता नहीं ---??
---------------------------

शुक्ल भ्रमर ५
२०.०७.२०११ जल पी बी
८.५५ पूर्वाह्न
------------------------------------
भैया का गहना है बहना !!
रक्षा -बंधन और मिठाई

बहना मेरी दूर पड़ा मै
दिल के तू है पास
अभी बोल देगी तू "भैया"
सदा लगी है आस
-------------------
मुन्नी -गुडिया प्यारी मेरी
तू है मेरा खिलौना
मै मुन्ना-पप्पू-बबलू हूँ
बिन तेरे मेरा क्या होना !
---------------------------
तू ही मेरी सखी सहेली
कितना खेल खिलाया
कभी -कभी मेरी नाक पकड़ के
तूने बहुत चिढाया !
--------------------
थाली में तू अपना हिस्सा
चोरी से था डाल खिलाया
जान से प्यारी मेरी बहना
भैया का गहना है बहना !!
----------------------------
जब एकाकी मै होता हूँ
सजी थाल तेरी वो दिखती
चन्दन जभी लगाती थी तू
पूजा -मेरी आरती- करती !
रक्षा -बंधन और मिठाई
दस-दस पकवान पकाती थी
-----------------------------
बाँध दिया बंधन से तूने
ये अटूट रक्षा जो करता
मेरी बहना सदा निडर हो
ख़ुशी रहे दिल हर पल कहता
-------------------------------
जहाँ रहे तू जिस बगिया में
हरी-भरी हो फूल खिले हों
ऐसे ही ये प्यारा बंधन
सब मन में हो -गले लगे हों
-------------------------------
तू गंगा गोदावरी सीता
तू पवित्र मेरी पावन गीता
तेरी राखी आई पाया
चूम इसे मै गले लगाया
-----------------------------
कितने दृश्य उभर आये रे
आँख बंद कर हूँ मै बैठा
जैसे तू है बांधे राखी
मन -सपने-उड़ता मै "पाखी"
---------------------------------
तेरी रक्षा का प्रण बहना
रग-रग में राखी दौडाई
और नहीं लिख पाऊँ बहना
आँख छलक मेरी भर आई
---------------------------------
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
१३.०८.११ ८.४५ पूर्वाह्न
जल पी बी

Last edited by shuklabhramar5; April 12th, 2014 at 07:01 AM. Reason: all poems in one thread
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  #2  
Old February 12th, 2011, 09:33 AM
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Re: “ Koyla”- Bhramar –Hindi poem

Bharmaar saab,
eggo rekwest hai... agar ho sake to apni saari rachnaayein ek hi thread mein post karne ki koshish karein. Aur choonki aap hindi section mein post kar rahe hain to agar devanagri lipi mein post kar dengein to achchha rahega...

sadharan bolchal roman lipi mein jaari rakh sakte hain... par agar apni kavitayein devanagri mein prakashit kar dete to hum chand hindi pathako.n ko aasaani ho jaati.

sadhanyavad,
bhavdiya,
chitrala.
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I am here because I am nowhere else. But, am I there where I wanted to be?

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  #3  
Old February 12th, 2011, 09:44 AM
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Re: “ Koyla”- Bhramar –Hindi poem

Chitrala saab,
Dhanyavaad aap ki salah ke liye , hindi devnagri me type karna thoda mushkil hai ..ek he thread me kaise anek rachnaye daalun ..shirshak alag alag hai to ..fir ek he din to sb nahi daalna n.....

bhavdiya.
surendrashuklabhramar.
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  #4  
Old February 12th, 2011, 09:59 AM
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dhanyavad

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Originally Posted by shuklabhramar5 View Post
chitrala saab,
dhanyavaad aap ki salah ke liye , hindi devnagri me type karna thoda mushkil hai ..ek he thread me kaise anek rachnaye daalun ..shirshak alag alag hai to ..fir ek he din to sb nahi daalna n.....

Bhavdiya.
Surendrashuklabhramar.

भ्रमर सा'ब,
अापकी शीघ्र प्रतिक्रिया के लिये धन्यवाद!
मैं अापकी देवनागरी में type करने की समस्या को समझ सकता हूँ. मैंने अापसे एक ही सूत्र में प्रकाशन का निवेदन इसीलिये किया था कि इससे अापकी समस्त रचनाएं एक ही जगह संकलित रहेंगी अौर पाठकों को वाचन करने में सुविधा होगी।
अाप हरेक post का शीर्षक अासानी से परिवर्तित कर सकते हैं, जैसा कि मैंने किया है। अौर अाप किसी सूत्र में भी अपने post कभी भी डाल सकते हैं ।

सधन्यवाद,
अापका शुभेच्छु,
चितराला.
__________________
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  #5  
Old February 12th, 2011, 10:18 AM
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Re: dhanyavad

Chitrala bhai,
Devnagri type karne ka aasaan tarika bhi bata dete to hum aapko dhanyawaad dete aise
Quote:
Originally Posted by chitrala View Post
भ्रमर सा'ब,
अापकी शीघ्र प्रतिक्रिया के लिये धन्यवाद!
मैं अापकी देवनागरी में type करने की समस्या को समझ सकता हूँ. मैंने अापसे एक ही सूत्र में प्रकाशन का निवेदन इसीलिये किया था कि इससे अापकी समस्त रचनाएं एक ही जगह संकलित रहेंगी अौर पाठकों को वाचन करने में सुविधा होगी।
अाप हरेक post का शीर्षक अासानी से परिवर्तित कर सकते हैं, जैसा कि मैंने किया है। अौर अाप किसी सूत्र में भी अपने post कभी भी डाल सकते हैं ।

सधन्यवाद,
अापका शुभेच्छु,
चितराला.
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  #6  
Old February 12th, 2011, 10:32 AM
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Re: dhanyavad

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Originally Posted by swami View Post
Chitrala bhai,
Devnagri type karne ka aasaan tarika bhi bata dete to hum aapko dhanyawaad dete aise
स्वामी जी,
मैं तो mac का in-built system का उपयोग करता हूँ....epic browser अापको हिंदी में type करने की सुविधा प्रदान करता है... google transliteration का प्रयोग भी किया जा सकता है...या फिर hindipad या quillpad की सुविधा ली जा सकती है....firefox के कुछ add-ons भी हैं...

https://addons.mozilla.org/en-us/fir...mukh-type-pad/
https://addons.mozilla.org/en-us/fir...spell-checker/
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  #7  
Old February 12th, 2011, 10:48 AM
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Re: “ Koyla”- Bhramar –Hindi poem

अब हम हिंदी सिख गए

Peaceseeker हो कहाँ

धन्यवाद Chitrala जी


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  #8  
Old February 12th, 2011, 10:52 AM
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Thumbs up Sookhi Roti-Bharmara(Hindi Poem).

Kandhe par “Bora”(juit bag)
Vo taange,
Sheet lahar me
Simta sa,
Kuchh kaagaj kuchh-
Keel v raddi,
Plastic shayad
Binta tha,
Najren kabhi uthata-
Tha n. koore par –
Bas aankhen,
Kabhi hanse kuchh-
Baat kare khud-
“Paagal” sa gata-
jata. kabhi kisi ko-
dekhe hansta,
daant shwet –
chamkaata tha,
Mai bhauchakka
Khada dekhta,
Is haalat me
Paley jiye vo,
Kaise hansta??

Bhaun bhaun kr
Jab kuttey bhoonke,
Najar gayi us oar,
Kuttey ke sang
Vo ladta tha,
Jaise koi ‘chor’

Chheena jhapti
Kiski khatir
Naa sona na chandi-
Bandhi gathri
me dikhi ek,
Sookhi Roti,
Jo sone here
Se badhkar
Bhookhe ko-
bs hoti.
8.15 P.M. 12.2.11
Jal(PB)
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  #9  
Old February 12th, 2011, 11:55 AM
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Re: “ Koyla”- Bhramar –Hindi poem

@shuklabhramar5 .. try this for hindi typing : http://www.quillpad.in


@moderators.. what is the relation of the "who killed aarushi" poll to this thread? Please delete the poll or move it to another thread or whatever.
__________________
Nietzsche (1887) : God is dead
God (1900) : Nietzsche is dead
-----------------------------------------
I will not be hurried and I will not be bullied

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  #10  
Old February 12th, 2011, 12:29 PM
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Re: “ Koyla”- Bhramar –Hindi poem

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Originally Posted by raniraja View Post
@shuklabhramar5 .. try this for hindi typing : http://www.quillpad.in


@moderators.. what is the relation of the "who killed aarushi" poll to this thread? Please delete the poll or move it to another thread or whatever.
Thanx for ur comments i tried to delete the comment but sorry could not edit as forget the link from where to go for edit polls ...can u tell me just now pls?????????

shukla bhramar
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  #11  
Old February 12th, 2011, 01:24 PM
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सूखी रोटी -



कंधे पर बोरा (जूट का थैला )
वो टाँगे ,
शीत लहर में
सिमटा सा ,
कुछ कागज़ कुछ -
कील व् रद्दी ,
प्लास्टिक शायद
बिनता था ,
नजरें कभी उठाता -
था न . कूरे पर –
बस आँखें ,
कभी हँसे कुछ -
बात करे खुद -
“पागल ” सा गाता -
जाता . कभी किसी को -
देखे हँसता ,
दांत श्वेत –
चमकाता था ,
मै भौचक्का
खड़ा देखता ,
इस हालत में
पले जिए वो ,
कैसे हँसता ??

भौं भौं कर
जब कुत्ते भूंके ,
नजर गयी उस ओर ,
कुत्ते के संग
वो लड़ता था ,
जैसे कोई ‘चोर ’

छीना झपटी
किसकी खातिर
ना सोना न चाँदी -
बंधी गठरी
में दिखी एक थी ,
सूखी रोटी ,
जो सोने हीरे
से बढ़कर
भूखे को -
बस होती .
८ .१५ मध्याह्न . १२ .२ .११
जल (पंजाब ) सुरेंद्रशुक्लाभ्रम्रर

Last edited by shuklabhramar5; February 12th, 2011 at 01:28 PM.
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  #12  
Old February 13th, 2011, 06:10 AM
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In search of peace!
 
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Re: “ Koyla”- Bhramar –Hindi poem

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Originally Posted by swami View Post
अब हम हिंदी सिख गए

peaceseeker हो कहाँ

धन्यवाद chitrala जी


यहीं हैं. साइड चेंज्ड.
__________________
Only peace remains at last!
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  #13  
Old February 19th, 2011, 07:12 AM
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“ Koyla”- A collection of hindi poem(Kavita) by Bhramar.

“ Koyla”- A collection of hindi poem (Kavita) by Bhramar.
..........".कोयला".....

ऐसे न मै बना ' कोयला '
देख - देख अन्दर धधका था
कितनी लाशें - " रोटी" खातिर ,
कहीं दबे- कुछ गए - दबाये ,
'' आह' ' से उनके आग लगी ,
भला यही सब रोका मैंने ,
हुआ कोयला,
नहीं तो दुनिया आग जली, .

सुरेंद्रशुक्लाभ्रमर
१९.२.११

..............कुटिया खुद की जला ली....
इतना पढ़ लिख,
ज्ञानी - विज्ञानी
क्या- क्या उपाधियाँ पा - ली
नयी खोज में -
दिशा - भटक के
"कुटिया" खुद की जला ली.

सुरेंद्रशुक्लाभ्रमर
१९.२.११
<<<<< 'राहत' >>>>>>

पहले ' राहत ' मिलने से ,
दिल बाग़ बाग़ हो जाता था ,
कैद भली - मन को अब लागे ,
बाहर ' झूठा ' नाता था.

सुरेंद्रशुक्लाभ्रमर
१९.२.११

<<<< काँटा अपने घर मत पालो>>>

काँटा अपने घर मत पालो.
इतना ही जो शौक तुम्हे - तो
जाओ उसकी "बाड़"- लगा दो
उस 'सीमा' के पास.
सुरेंद्रशुक्लाभ्रमर
१९.२.११
__________________
‘दादी’ –‘माँ’ -सपने ना मुझको
सच की तू तावीज बंधा दे
हंसती रह तू दादी अम्मा
आँचल सर पर मेरे डाले

Last edited by shuklabhramar5; February 19th, 2011 at 07:31 AM. Reason: TO USE ALL MY HINDI POEMS IN ONE THREAD WITH DIFFERENT TITLES
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  #14  
Old February 25th, 2011, 03:32 AM
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Koyla”- मेरी "रिसर्च" " मुंह में राम -बगल में छूरी&qu

मेरी "रिसर्च" " मुंहमें राम -बगल में छूरी"
Shukla bhramar –Kavita-Hindi poems.

बाप की -रंगरेलियां
नए नए -क्लब
काल सेंटर
मसाज सेंटर
सुर्ख़ियों में -नामचीन
अँधेरे में बढ़ते कदम
देख-बड़े के होश उड़े- कान खड़े
प्रतिरोध -रोज -रोज
मर्यादा -बाप और पूत की
टूटी.
और बाप ने - पैसे की लालच में
एक अनमोल 'हीरा' जुदा कर -
अपना अंग काट लिया
अपने ही हाथ से .

छोटा तो "छोटा" था
प्यारा-मॉडर्न -नया जनरेशन
ओत-प्रोत -यूरोपियन -
कल्चरका -जैसे का तैसा -
कापी - हर -कापी राइट -
उसकेपास- लिखता
लिखता -बढ़ा चला -
"काले" से "लाल " रंग -
चुनता -चलागया
अडल्टरेसन
माडरेसन
अमल्गमेसन
बिनापास -बिना वीजाके
सातसमंदरपार
आर्गनायिजेशन
निउजचैनल -मीडिया
बाप -बेटे -छाये
धरेगए -पाँवमें बेड़ियाँ -
धड़कन -मंद
विदेशी दवा-दारु ने
छोड़ दिया साथ
कुछ न बचा हाथ
बची यादें -कडवी दवाओंकी
देशी- देश- प्यारा-प्रेम
अनमोल "हीरा" उन्हें
पल-पलयादआया
और फिरउनकीसमझ
पक्कीहोगयी
की हरसाथी - साथ रहनेवाला -
"तोता' साथी नहीं होता .

और फिर मेरा प्रोजेक्ट
रिसर्च पूरी हो गयी
मैंने "हीरे" को उनसे मिलाया
बचाया - अटकी हुयी 'सांस'.
फिर मैंने मुहर लगा दी खुद
अपनी उपाधि के
विषय पर - कि
"दर्पण" झूठनहींबोलता-
परछाईबनाहर साथी -
"साथी" नहीं होता.
"आस्तीन" में 'सांप' भीहोता
"कड़वी दवा" अच्छीहोती
और 'मुंह' में 'राम' - बगल में
कभी -कभी "छूरी" भी होती .
सुरेन्द्रशुक्लाभ्रमर
२५.२.११.
A COLLECION OF HINDI POEMS BY BHRAMAR-NAARI ,PAGLI, PATANG..
__________________
‘दादी’ –‘माँ’ -सपने ना मुझको
सच की तू तावीज बंधा दे
हंसती रह तू दादी अम्मा
आँचल सर पर मेरे डाले
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  #15  
Old February 26th, 2011, 07:47 AM
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Re: “ Koyla”-ek koshish -surendrashuklaBhramar-kavita –Hindi poem

अभिव्यक्ति की आजादी
=======================
पढ़ते हुए बच्चे का अनमना मन
टूटती ध्यान मुद्रा
बेचैनी बदहवासी
उलझन अच्छे बुरे की परिभाषा
खोखला करती खाए जा रही थी .......
कर्म ज्ञान गीता महाभारत
रामायण राम-रावण
भय डर आतंक
राम राज्य देव-दानव
धर्म ग्रन्थ मंदिर मस्जिद ..और भी बहुत कुछ ..
पी एच डी कर भी जेल जाना
गरीब अमीर परदा दीवार
आरक्षण भेदभाव मनुवाद सम्राज्य्वाद
सब मकड़जाल सा उलझा तो
बस उलझता गया…. दिमाग सुन्न.......
किताबें फेंक…शोर में खो गया
गुड्डे गुड़िया के खेल में
अचानक क्रूरता हिंसा ईर्ष्या जागी
कपडे नोंच चीड़ फाड़ रौंद पाँव तले

नर- सिंह सा हांफ गया ............................
आजादी -आजादी इस से आजादी उस-से आजादी या फांसी ?
अभिव्यक्ति की आजादी ...
कुछ लोगों की भेंड़ चाल झुण्ड देख
वह दौड़ा अंधकार में अंधे सा ....
माँ ने एक थप्पड़ जड़ा ..रुका ……
आँचल से पसीना पोंछ ..समझाया
बैठाया… प्यार से पोषित कर , दिखाया
देख ! चिड़िया भी अपना घर तिनके तिनके ला
बनाती हैं घोंसला… उजाड़ती नहीं
बन्दर मत बन -….उजाड़ -आग -विनाश नहीं
जिस थाली में खाते हैं छेद नहीं करते
अपना घर परिवेश समाज देश समझ
संस्कार प्यार ईमान धर्म कर्म
तेरे खोखले पी. यच. डी. विज्ञान पर भारी हैं
भूख ..गरीबी जाति धर्म नहीं देखती
न ये वाद ..न वो वाद ..विवाद ही विवाद
सामंजस्य समझौता परख जाँच
जरुरी है महावीर बुद्ध ज्ञानी बनने हेतु
शून्य में विचर पानी में लाठी मत पीट
कुएं में एक भेंड़ कूदी
फिर सब सत्यानाश ...हाहाकार
जंगल राज ..अन्धकार से सहजता में आ
सरल बन ..शून्य बन
फिर ऊंचाइयों में चढ़ना आसान है
बच्चे ने आकाश की ऊंचाइयों में झाँका
कुछ आँका ..जाँचा
समझ आ गयी थी
आग लगाने से विकास नहीं होता
होता है विनाश ..नंगापन का नाच
भूख नहीं मरती
कटुता ही है बढ़ती
और हम आ जाते हैं ग्राफ में नीचे
पचास साल और पीछे
और फिर तिरंगा ले वह सावधान हो गया
वन्दे मातरम ..
जय हिन्द .....
उहापोह अब सुसुप्ति में आ चुका था ...
=========================
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
कुल्लू यच पी
६-६.५२ पूर्वाह्न

२८ फरवरी २०१६




छोरी छोरवन क अजब धमाल है कान्हा की कारगुजारी।
आज उड़त अबीर गुलाल
छोरी छोरवन क अजब धमाल
है कान्हा की कारगुजारी। …
=================
मिटटी लेप किये कोई कजरा लगाये
बनरे लाल मुख धारी कोई लंगूर आये
कुर्ता टोपी रंगे कोई कपड़ा भी फाड़े
छोटी बड़ी पिचकारी रंग मारे बौछारें
ढोल मजीरा कोई पीटे है ताली
है कान्हा की कारगुजारी। … —–
आज उड़त अबीर गुलाल
छोरी छोरवन क अजब धमाल
है कान्हा की कारगुजारी। …

===========================
काला मुख लिए मोतियन सी आँखें
राधा गोपियन की टोली है राह में ताके
तिरिया चक्कर से बच चलो झांके
कान्हा ग्वालों की अटकी रे साँसें
लिए लट्ठ गजब की ये होरी
है राधा की कारगुजारी। ……………।
आज उड़त अबीर गुलाल
छोरी छोरवन क अजब धमाल
है कान्हा की कारगुजारी। …
null
============================
लाल गाल वाली सभी हरी पीली रंगी
चोली घाँघरा चूनर है अजब सतरंगी
गायें फगुवा कड़क जैसे दामिनि
काली दुर्गा ये प्रेम रंगी कामिनि
अरी ! होली है या री कबड्डी। …
है राधा की कारगुजारी ———–
आज उड़त अबीर गुलाल
छोरी छोरवन क अजब धमाल
है कान्हा की कारगुजारी। …
from google/net with थैंक्स bhramar5
=========================
खाये भंग पिए हैँ ठंडाई
ऋतु वासन्ती इनपे है छायी
प्रेम परवान जोड़ी बनि के आयी
कामदेव नजरों में खुमारी है छायी
इन्द्र दरबार परियाँ ज्यों आयीं —–
है कान्हा की कारगुजारी ———
आज उड़त अबीर गुलाल
छोरी छोरवन क अजब धमाल
है कान्हा की कारगुजारी। …
==========================
पहने साड़ी बने कान्हा नारी
सेंध लाये धरे राधा प्यारी
ह हा हि ही हुल्लड़ गायें होरी
चूर मस्ती गजब खेलें होरी
छलके रस-रास यादगार होरी
है कान्हा की कारगुजारी। ।
आज उड़त अबीर गुलाल
छोरी छोरवन क अजब धमाल
है कान्हा की कारगुजारी। …
===================
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर’५
प्रतापगढ़ भारत
१५. ०३. १४
१० से १०. २५
हरदोई -लखनऊ मार्ग
लौह पथ गामिनी में
==================


==================

" कोशिश "
अन्धकार !
एक किरण फूटी,
'कोने' से - एक झरोखे से
'वो' - निकला - बढ़ा,
मुस्कराया-
अभिवादन किया
फिर चढ़ने की 'कोशिश'
आसमान में उड़ने की तमन्ना..
थोडा चढ़ा ..गिरा....
फिर चढ़ा -गिरा..
गिरा -गिरा-गिरा....
फिर - गिरा-
हम हँसते -ठहाके लगाते रहे
गिरने पर हँसने की आदत है -
हमें - बालपन से
गिरने पर - मजा आता है,
लड़खड़ाते बच्चे पर
'रेस' लगाते घुड़सवार पर
थिरक-थिरक गिरती कटी - पतंग पर
पत्थर की 'चोट खाए' गिरते 'आम' पर
'पतझड़' में झरझरा - गिरते पत्तों पर
बारिश की बूंदों पर-
फसलों को चौपट करते 'ओलों' पर
सूरज से 'जेठ' में गिरते शोलों पर
पहाड़ से गिरते झरनों पर
कुश्ती में चित्त पहलवान पर
विधानसभा - संसद में भड-भडाकर-
गिरती सरकार पर ,
दलाल - स्ट्रीट में गिरते "शेयर" पर
प्याज टमाटर के बढ़ते- गिरते मूल्य पर
पटरी से लुढ़कती - एक के ऊपर एक-
चढ़ते - गिरते 'रेल' के डिब्बों पर -
और भी न जाने कितने -किस किस पर
और तभी 'वो' हमारा -
हंसी का पात्र - 'जोकर' -"नायक" -
धमधमाते - ऊपर चढ़ा,
सारी " रौशनी" फोकस उसके ऊपर
छोड़ हाथ - 'आसमान' में- 'जम्प' -
कलाबाजियां - 'ये' मंच वो 'मंच'
छोड़ता - पकड़ता - उड़ता चला-
हमारी आँखें फटी की फटी
सर उठाये उस 'जोकर' को
आसमान में ताकते
सोचते पड़े -कि
गिरने वाला ही - चढ़ सकता है
बढ़ सकता है -
"एक- कोशिश"
रोने से - मुस्कराहट
अंधकार से उजाले
ज़मी से आसमां तक
फैली है - 'जो'
सुरेन्द्रशुक्लाभ्रमर
२६.०२.२०११
जल (पी.बी.)
८.१० पूर्वाहन .

मेरे घर के बगल कौन है ?
=================
मेरे घर के बगल कौन है ?
सन्त महाजन या आतंकी
मंथन आओ कर लें प्यारे
भूख है हम को कितनी धन की ,,,
======================
प्रेम क्रोध या घृणा ईर्ष्या
जांचो परखो क्या कुछ देते
मारो-काटो ले लो बदला ??
जीवन क्षण भंगुर कर देते ..
========================
मानव योनि है दुष्कर पाए
संस्कार भारत भू आये
अच्छा -अच्छाई आ चुन लें
घर आँगन से नीव ये रख लें ..
==========================
मात-पिता सन्तति मन झांकें
सखा भाव रख मन को आंकें
कौन कोयला- हीरा परखें
बनें जौहरी सदा तराशें ...
=======================
अन्धकार जब बंद द्वार हों
निरखें आओ भरें उजाला
नफरत घृणा अकेलेपन को
दूर करें रख भाई चारा ..
========================
बारूदों विस्फोट में जल-जल
क्यों मरते घुट जलते तिल-तिल
ज्वालाओं से जल सब हारा
खो अपना जग कौन है जीता ...
--------------------------------------------
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
कुल्लू हिमाचल भारत

२५-जनवरी -२०१६




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं
__________________
‘दादी’ –‘माँ’ -सपने ना मुझको
सच की तू तावीज बंधा दे
हंसती रह तू दादी अम्मा
आँचल सर पर मेरे डाले

Last edited by shuklabhramar5; April 7th, 2016 at 03:51 AM. Reason: added new post
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bhramar, hindi kavita, kavi, kavita, poetry


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