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  #1  
Old March 14th, 2013, 10:21 AM
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जरा सोचें...!!!!


जरा सोचें...!!!!

- कोलगेट नही था तो क्या भारत में पति पत्नी साथ नही सोते थे?

- चाय नहीं थी तो क्या सब सुस्त और आलसी थे सुबह खडे नही हो पाते थे?

- क्रिकेट नही था तो क्या भारतीय खेलते ही नही थे?

- वैलेनटाइन नही था तो क्या भारतीय प्रेम नही करते थे?

- फेयर n लवली नही थी तो क्या सब भारतीय नारी काली थी?

- स्कर्ट नही थी तो क्या भारत में लडकियां पढती नही थी?

- अमूल माचो नही था तो क्या भारतीय नंगे रहते थे?

- डिस्को नही था तो क्या भारत में संगीत नही था?

- ओह माई गोड शब्द नही था तो क्या भारतीय भगवान नही मानते थे?

- लाइफ बाय लक्स नहीं था तो भारतीय गले सडे रहते थे?

- पैंटीन नही था तो क्या सब गंजे हो जाते थे?

- अंग्रेजी नही थी तो क्या भारत में कोई ज्ञानी नही था?

देसी चीजों को बढ़ावा दो विदेसी चीजों का बहिसकार करो....

ये पोस्ट समझदारो के लिए है कोई बेवकूफ अपनी समझदारी ना दिखाये....

जय हिन्द !!
__________________
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  #2  
Old March 14th, 2013, 10:23 AM
Premi's Avatar
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Re: जरा सोचें...!!!!


सब लोग बैठे थे
पढ़ाई की बात चल रही थी...
तब बात चल पड़ी की किसने अपने अपने धर्म
की कौन
कौन सी पुस्तक पढ़ रखी है ...
मैंने कहा रामायण,गीता,श्र मद भगवत पढ़/सुन
चुका हूँ और शिव पुराण पढ़ रहा हूँ ...
इतना सुनते ही हिन्दू भाई परेशान और
आश्चर्यचकित हो गए...
तब एक मुसलमान लड़की बोली की मैंने कुरान पढ़ रखा है ....
फिर मैंने हिन्दू मित्रों से पूछा की आप लोगों ने
क्या गीता कभी पढ़ी है ???
जवाब आया-- नहीं
मैंने कहा अच्छा रामायण की एक दो चौपाई
तो पढ़ी ही होगी ??
उसका भी जवाब आया -नहीं
मैंने पूछा अच्छा रामायण की चौपाई और
गीता का श्लोक छोड़ो क्या उन दोनों का अर्थ
भी पढ़ा है ??
उसका भी जवाब आया -- नहीं ...
ये सब वो लड़की सुन रही थी ... और मुझे
ताना मरते
हुए बोली ... हमारे धर्म मे ऐसा शायद ही कोई
ऐसा हो जिसने कुरान न पढ़ी हो
मैं भी क्या करता ...
मैं समझ गया था की हिंदुओं का पतन किस कारण
हो रहा है ...
__________________
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  #3  
Old March 14th, 2013, 10:32 AM
Mukesh's Avatar
Mukesh Mukesh is offline
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Re: जरा सोचें...!!!!

आप के कहने का मतलब क्या है ? क्या कुरान पढ़ने से मुस्लिमो का उत्त्थान हो गया है ?
__________________
Whenever you think that you are arguing with a fool, you must make sure that he is not doing the same.
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  #4  
Old March 14th, 2013, 10:56 AM
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swami swami is offline
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Re: जरा सोचें...!!!!

Thanks to Rakhi,this forum has taken off
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  #5  
Old March 14th, 2013, 11:21 AM
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Premi Premi is offline
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Re: जरा सोचें...!!!!

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Originally Posted by mukesh View Post
आप के कहने का मतलब क्या है ? क्या कुरान पढ़ने से मुस्लिमो का उत्त्थान हो गया है ?


कुरान पढ़ने से मुस्लिमो का उत्त्थान हुआ नहीं लेकिन गीता नहीं पढ़ना निश्चित रूप से हिन्दुओं के पतन का एक कारण है!
__________________
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  #6  
Old March 14th, 2013, 06:05 PM
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Re: जरा सोचें...!!!!

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Originally Posted by Premi View Post
कुरान पढ़ने से मुस्लिमो का उत्त्थान हुआ नहीं लेकिन गीता नहीं पढ़ना निश्चित रूप से हिन्दुओं के पतन का एक कारण है!
Hindu vyakti ke patan ka karan nahi...hindutva vichardhara ke patan ka karan hai
__________________
Hum woh hai jo vidhaata ka bhagya likhte hai
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  #7  
Old March 14th, 2013, 08:29 PM
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Mukesh Mukesh is offline
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Re: जरा सोचें...!!!!

भारत जो कभी विश्वविजेता था , सम्पूर्ण विश्व जिसके ज्ञान - विज्ञान और शक्ति के सामने झुकता था तथा जिसकी शर्तो पर उसका विश्व के अन्य देशों के साथ व्यापार होता था । आखिर क्या कारण रहा कि वह अपने गौरवशाली इतिहास और वैभव को खो बैठा तथा पद्च्युत होकर बाहर से आई मुठ्ठीभर मजहबी और साम्राज्यवादी शक्तियों का गुलाम हो गया ?


इसका कारण जानने के लिए हमें भारतीय इतिहास के पाँच हजार वर्ष पुराने पृष्टों को खंगालना पडेगा । महाविनाशकारी विश्वयुद्ध महाभारत में बहुत बडी संख्या में वेदज्ञ विद्वानों के मारे जाने के कारण भारत में वेदों के पठन - पाठन और प्रचार का कार्य शनै - शनै लुप्त होता चला गया , तदानुपरांत विद्वानों की प्रतिष्ठा और क्षमता भी कम हो गई तो कालांतर में देश में में देश में अनेक अवैदिक और भोगवादी मत - मतांतरों चार्वाक , बृहस्पति , तांत्रिक और वाममार्गी आदि सम्प्रदायों ने जन्म लिया । वेदों के गूढ़ तत्वज्ञान से रहित अनेक प्राचीन भाष्यकारों ने अपने मंतव्यानुसार वेद मंत्रों के अर्थ का अनर्थ कर दिया । वैदिक शास्त्रों को विकृत किया गया और अवैदिक शास्त्रों की रजना की गई । जिसके परिणाम स्वरूप बहुदेवतावाद , अवतारवाद , जातिवाद , छुत - अछुत , अशिक्षा , यज्ञ में पशु बलि देना जैसी कुप्रथाओं का प्रचलन हुआ और स्वार्थी हो चले समाज के अमानवीय हिंसात्मक कार्यकलापों से मानवता त्राहि - त्राहि करने लगी । ऐसे विषम समय में लगभग 2600 वर्ष पूर्व भारतवर्ष में भगवान महावीर और भगवान बुद्ध दो ऐसे महापुरूष उत्पन्न हुए जिन्होंने उस समय की परिस्थिति को देखते हुए केवल अहिंसा को ही परम धर्म माना । इन दोनों महापुरूषों ने अहिंसा पर बडा बल दिया और युद्ध का घोर विरोध किया । उनका संदेश था कि ' अपनी ही अन्तरात्मा से युद्ध करों बाहर के युद्ध से क्या लाभ ? '


वैदिक ज्ञान से वंचित हो चुके जनसामान्य के मन - मस्तिष्क पर उनका बहुत प्रभाव पडा तथा वे उनके अनुयायी हो गये , साथ ही जैन व बौद्ध धर्म को राज्याश्रय भी प्राप्त हुआ । इसका सुखद परिणाम यह हुआ कि उस समय यज्ञ में जो पशु हिंसा होती थी , वह बंद हो गई । किन्तु भगवान महावीर व भगवान बुद्ध की देशनाओं को ठीक से न समझ पाने के कारण करोडों भारतीय वीर वैदिक अहिंसा को छोडकर अविवेकी अहिंसा का आश्रय लेकर जैन श्रावक और बौद्ध भिक्षुक बनकर कायर , डरपोक और नपुंसक बन गये ।


वे भूल गये कि जैन धर्म या बौद्ध की अहिंसा भी वैदिक अहिंसा की तरह सभी प्रकार की परिस्थितियों में शस्त्र प्रतिकार का निषेध नहीं करती । जिन जैन लोगों ने राज्य स्थापित किये , वीर एवं वीरांगनाओं को निर्मित किया , जिन्होंने समरभूमि पर शस्त्रों से युद्ध किये , उनका जैन आचार्यो ने कहीं भी कभी भी निषेध नहीं किया है । अन्यायकारी आक्रमण का सशस्त्र प्रतिकार करना केवल न्याय ही न होकर आवश्यक भी है , ऐसा जैन धर्म का प्रकट प्रतिपादन है । यदि कोई सशस्त्र आतातायी मनुष्य किसी साधु की हत्या करने का प्रयास करे , तो उस साधु के प्राणों की रक्षा हेतु उस आतातायी को मार डालना यदि आवश्यक हो तो उसे अवश्य ही मारना चाहिये , क्योंकि उस प्रकार की हिंसा एक प्रकार से सच्ची अहिंसा ही है , ऐसा उसका समर्थन जैन शास्त्रों ने किया है । वैदिक शास्त्रों के कथनानुसार ही जैन शास्त्रों का यह भी कथन है कि ऐसी परिस्थिति में हत्या का पाप उसे लगता है जो मूलभूत हत्यारा है , न कि उसे , जो हत्यारे का वध करने वाला है - ' मन्युस्तन मन्युमर्हति । ' भगवान बुद्ध ने भी इसी प्रकार का उपदेश दिया है । एक बार किसी टोली के नेता भगवान बुद्ध के पास पहुँचे और किसी अन्य टोली के आक्रमण के विरूद्ध उनका सशस्त्र प्रतिकार करने की अनुज्ञा माँगने लगे , तब भगवान बुद्ध ने उन्हें सशस्त्र प्रतिकार करने की आज्ञा दी । भगवान महात्मा बुद्ध बोले , ' सशस्त्र आक्रमण के प्रतिकार स्वरूप युद्ध करने में क्षत्रियों के लिए कोई भी बाधा नहीं है । यदि सत्कार्य के लिए वे सशस्त्र लडते है तो उन्हें कोई पाप नहीं लगेगा । '


भारतवर्ष सम्राट अशोक के समय लगभग 2200 पूर्व तक तो गौरवपूर्ण और विश्ववंदित था , किन्तु अशोक के बौद्ध धर्म अपना लेने के बाद का इतिहास भारत के पतन का इतिहास है । वैदिक अहिंसा को छोडकर अविवेकी अहिंसा को अपनाने के कारण भारत पर अनेक आक्रमण हुए और अन्ततः विश्वविजेता रहे भारत का पतन हो गया । सन 630 ईश्वी में जब प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वैन्त्साग भारत में आया तो उसने लिखा कि कप्पिश ( काफिरस्तान ) सारा बौद्ध हो गया था । लम्पाक और नगर ( जलालाबाद ) में कुछ हिन्दुओं को छोडकर शेष सारा काबुल बौद्ध हो गया था । बंगाल और बिहार तो बौद्धों के प्रमुख गढ़ बन गये थे । बंगाल और बिहार में जैन और बौद्ध धर्म का हिंसा के विरूद्ध इतना प्रचार था कि बंगाल और बिहार के निवासी सेना में भरती नहीं होते थे । इस अविवेकी अहिंसा का परिणाम यह हुआ कि भारतीयों के जीवन में शत्रुओं के दमन की , देश , जाति और धर्म की रक्षा की भावना नष्ट हो गई । परिणाम स्वरूप भारतवर्ष परतंत्र एवं पराधीन हुआ ।

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  #8  
Old March 15th, 2013, 02:50 AM
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krantikari krantikari is offline
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Re: जरा सोचें...!!!!

Mana ki bharat har kshetra me sarvpratam hua karta tha.
Jab kalyug aaya, to isme pravesh bhi sarvpratham karega, ye to swabhavik hai na ?
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Ab ki baar Modi sarkar !
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  #9  
Old March 15th, 2013, 10:20 AM
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Re: जरा सोचें...!!!!

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कुरान पढ़ने से मुस्लिमो का उत्त्थान हुआ नहीं लेकिन गीता नहीं पढ़ना निश्चित रूप से हिन्दुओं के पतन का एक कारण है!
Padhte kaise ? Panditji ne padhai ko sirf apne aur kshtriya tak hi seemit rakha , aur duniya ka vikas manushya ke in dharmik pustako se pare sochne se hi hua hai

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Originally Posted by krantikari View Post
Mana ki bharat har kshetra me sarvpratam hua karta tha.
Jab kalyug aaya, to isme pravesh bhi sarvpratham karega, ye to swabhavik hai na ?
Sarvapratham ka to pata hi nahi thaa, Hindukush ke paschim ki duniya agyaat hi thii, Yunani sabhyata hamari sabhyata se kadapi kam nahi thii

jeetIAF
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One isn't born one's self. One is born with mass of expectation, a mass of other people's ideas- and you have to work it all.- Sir VS Naipaul
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  #10  
Old March 15th, 2013, 10:31 AM
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Talking Re: जरा सोचें...!!!!

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  #11  
Old March 15th, 2013, 10:45 AM
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Re: जरा सोचें...!!!!

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aapne kuran bhi nahi padi yaa hindi samajh nahi aayi.

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  #12  
Old March 15th, 2013, 12:27 PM
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Wink Re: जरा सोचें...!!!!

सोच बद्लो ..देश बद्लेगा...

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  #13  
Old March 15th, 2013, 01:00 PM
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Re: जरा सोचें...!!!!

Ye kya aitihaasik roop se pramanit ho chuka hai ki Mahabharat ka yudh 5000 saal pahle hi hua tha?
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  #14  
Old March 15th, 2013, 01:09 PM
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Re: जरा सोचें...!!!!

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सोच बद्लो ..देश बद्लेगा...

desh badal badal ke hi ye haalat kar di humne.

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  #15  
Old March 15th, 2013, 01:10 PM
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Talking Re: जरा सोचें...!!!!

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desh badal badal ke hi ye haalat kar di humne.

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