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  #16  
Old April 16th, 2015, 11:50 AM
Jagmohan Jagmohan is offline
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Re: News or Bubble

^^ Hmmmmm.. it seems like,

Raam, vaapis ayodyaa laut aaye ! ( jaaye toh jaaye kahaan ? )

Khair, jo bhi ho,..

Dhol bajne laga,... dance sajne laga,... Koi laut ke aaya hai !!!
Sang apne woh,... rang kitne laaya hai !

( Ya fir,.. "Men in white" - Abaas-mustaan style - still, woh hi white Zhabhbha lehangha only ! ? ! )

Last edited by Jagmohan; April 16th, 2015 at 11:55 AM.
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  #17  
Old April 16th, 2015, 09:53 PM
Jagmohan Jagmohan is offline
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Re: News or Bubble

नेट निष्पक्षता क्या है?

नेट निष्पक्षता का अर्थ है, एक मुक्त इंटरनेट, जिसके किसी भी हिस्से को देखने/पढ़ने/सुनने के लिए सिर्फ़ एक प्रकार के साधन की आवश्यकता हो। अर्थात डाटा, किसी भी प्रकार का डाटा, समान माना जाये, और उसमें इसलिए कोई भेद ना किया जाये की वह कमेंट है, या वीडियो है या फोटो है। साधारण शब्दों में, आज आप अपने घर पर इंटरनेट लेते है, या फिर अपने मोबाइल फ़ोन पर इंटरनेट लेते हैं। आप उसके लिए पैसे देते है। घर पर ब्रॉडबैंड के अलग अलग डाटा रफ़्तार यानि स्पीड के पैकेज है, आप शायद वाई फाई भी लगा ले। वैसे ही मोबाइल पर भी कई पैकेज है, 2जी 3जी या फिर जल्द ही आने वाला एलटीई 4जी। एक बार हमने पैकेज ले लिया, उसके पश्चात हम उस इंटरनेट पर क्या करते हैं, उससे हमारे सर्विस प्रोवाइडर को कोई मतलब नहीं होता। हम चाहे तो यू ट्यूब पर वीडियो देखें, गाने सुनें, व्हाट्स एप्प या फेसबुक पर दोस्तों से बातचीत करें। वीडियो चाट या फिर स्काइप पर VOIP वाले कॉल करे। हमारे फ़ोन वाले या ब्रॉडबैंड वाले हमें सिर्फ़ इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए पैसे लेते हैं। यह है आज की परिस्थिति। और यही है नेट निष्पक्षता।

क्या बदल रहा है?

यदि आज का नेट निष्पक्ष है, फिर हम सभी इसके बारे में बात क्यों कर रहे हैं? क्या यह बदल रहा है? जी हाँ, यह बदल रहा है। हमारे देश की टेलिकॉम कंपनियाँ चाहती है कि वह हमें अलग अलग तरह के पैकेज बेचे। वह हमारे डाटा इस्तेमाल करने के अलावा वह डाटा कैसे इस्तेमाल होगा, उसके पैसे भी लेना चाहते हैं। जैसे की WhatsApp के लिए अलग पैकेज, Facebook के लिए अलग पैकेज, और YouTube के लिए अलग पैकेज। वैसे ही और भी अलग अलग पैकेज मिलेंगे, अलग कार्यों के लिए। अभी टेलिकॉम कंपनियों ने पैकेज बनाए नहीं है। पर वह इंतज़ार कर रहे है ट्राई के आदेश का। फिर शायद आपको सोशल नेटवर्किंग के लिए अलग पैसे देने पड़े, गाना सुनने के लिए अलग और वीडियो देखने के लिए अलग।

आपको एक बात और बता दे, जैसे आज आप एक वेब साइट से दूसरे पर एक लिंक पर क्लिक करके चले जाते हैं, वैसे आने वाले दिनों में जाना आपकी जेब के लिए खतरनाक रहेगा। जब अलग अलग पैकेज रहेंगे, तो आपको सावधानी बरतनी पड़ेगी। यदि आपने वीडियो का पैकेज नहीं लिया है, और फेसबुक के किसी लिंक पर क्लिक करके यू ट्यूब के वीडियो को चला दिया, तो बिना पैकेज वाला चार्ज लग जाएगा। और आपको पता होगा की बिना पैकेज वाला नेट का चार्ज कैसे लगता है। पता भी नहीं चलता और ढेरों पैसे चार्ज हो जाते है। कितना भी सर फोड़ ले हेल्प डेस्क के साथ, चार्ज वापस नहीं होता। कहा जाता है की आपने नेट इस्तेमाल किया है। अब कहा और कैसे, यह बताना उनका काम नहीं है।

इसकी एक और बड़ी समस्या होगी पक्षपात। आपकी फ़ोन कंपनी यदि चाहे तो वह किसी एक कंपनी की वेब साइट जल्दी खुलेगी और दूसरे वही सुविधा देने वाली कंपनी की साइट देर से खुलेगी, या फिर उसके लिए अलग से पैसे देने पड़ेंगे। जैसे अभी रिलायंस ने internet.org के नाम से एक सुविधा शुरू की है, जिसमे कुछ साइट ही खुलती है। यह वही साइट होगी, जिन्होंनें रिलायंस को पैसे दिये होंगे। एयर टेल भी एक नया प्लान ला रही थी, जिसमे फ्लिपकार्ट खुलेगी, परंतु अन्य साइट के लिए पैसे देने पड़ेंगे।

क्या यह परिवर्तन सही है?

इसमें बहुत मतभेद है। फ़ोन कंपनियों के अनुसार यह सही है, और बहुत से लोगों के अनुसार यह गलत है। आपके सामने दोनों मत रख देता हूँ।

टेलिकॉम कंपनियों का कहना है कि:

· अलग अलग तरीके से इस्तेमाल किए जाने वाली इंटरनेट सुविधाओं की वजह से उनका लाभ कम हो रहा है। जैसे की लोगों ने SMS भेजना लगभग बंद कर दिया है, अब Whatsapp या फिर वैसी ही दूसरी सुविधाओं का प्रयोग कर रहे हैं। फिर अब Whatsapp, फेसबुक जैसी कई ऐप्लीकेशन लोगों को कॉल करने की सुविधा भी दे रही है। इसलिए जो कॉल मोबाइल फ़ोन से होता था, और फ़ोन कंपनी को पैसे मिलते थे, वह कॉल अब इंटरनेट द्वारा हो रहा है। इसलिए उन्हें अलग अलग सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए अलग अलग पैसे मिलने चाहिए।

· आवाज़, गाना, वीडियो के लिए बहुत अधिक रफ़्तार एवं डाटा इस्तेमाल होता है। इनके लिए सिर्फ़ डाटा एवं रफ़्तार ही नहीं, बिना अस्थिरता के डाटा का प्रवाह निश्चित करना पड़ता है। दूसरे प्रकार के इंटरनेट के इस्तेमाल में यह कठिनाइयाँ नहीं आती। इसलिए उन्हें अलग अलग तरीके की सुविधाओं के लिए अलग पैसे मिलने चाहिए।

· टेलिकॉम कंपनियों के अनुसार प्रत्येक सुविधाओं में यह होता रहा है, और वह कुछ नया नहीं मांग रहे है। आप फ़ोन करते है, तो किस नंबर पर फ़ोन कर रहे है, उसके हिसाब से पैसे देते हैं। आप फ़िक्स्ड लाइन या लैंड लाइन पर फ़ोन करे तो कॉल के पैसे अधिक लगते हैं। यदि आपको याद हो तो किसी जमाने में एस टी डी के पैसे भी अधिक ही लगते थे। वैसे ही घर पर पानी या फिर बिजली देते वक़्त हमें उसके इस्तेमाल के लिए अलग तरीके से पैसे देने पड़ते है। यदि हम उनका इस्तेमाल घर पे अपने लिए कर रहे है, तो अलग मूल्य है और यदि उसे अपने व्यापार में इस्तेमाल करते है तो अलग मूल्य देना पड़ता है। घर पर भी यदि आप एक पूर्व निर्धारित सीमा से अधिक बिजली इस्तेमाल करते हैं तो अधिक पैसे देने पड़ते हैं। केबल टीवी के लिए भी पहले एकमुश्त पैसे देते थे, परंतु अब अलग अलग पैकेज के हिसाब से पैसे देने पड़ते हैं। यह मूल्यांकन कई पहलुओं पर ध्यान देकर निर्धारित किया जाता है, एवं इससे कंपनियों को अपने ग्राहकों को उच्च कोटी की सुविधा देने में आसानी होती है। यदि मूल्यांकन का यह रूप अन्य सभी सुविधाओं में मान्य है तो फिर इंटरनेट में क्यों नहीं?

विरोधियों का कहना है कि:

· हम जो कुछ भी इंटरनेट पर देखते, सुनते, लिखते, पढ़ते या कहते हैं, उसमें टेलिकॉम कंपनियों का कोई योगदान नहीं होता। अलग अलग वेब साइट टेलिकॉम कंपनियों ने नहीं बनाई है। उन्होंने सिर्फ़ पहले से ही उपस्थित फ्रिक्वेन्सी को लेकर हमें उसपर इंटरनेट की सुविधा दी है। उसके लिए हम उन्हें पैसे दे रहे हैं। हम जितना डाटा इस्तेमाल करते है, वह हमसे उतना पैसा लेती है। अब वो चाहते है की किसी और की बनाई हुई सुविधाओं से उन्हें मुनाफ़ा मिले। यह गलत है।

· इंटरनेट एवं अन्य सुविधाओं में समानता नहीं है। यदि पानी या बिजली की बात की जाये तो वह निर्मित की जाती है। सिर्फ़ भेजी नहीं जाती, इसलिए हम जब उनके लिए पैसे देते है, तो निर्माण कार्य के पैसे भी उसमें शामिल होते हैं। साथ में व्यावसायिक रूप में इस्तेमाल करते वक़्त हमें बिजली और पानी अधिक जरूरत पड़ती है, जिसके लिए अधिक पैसे देने पड़ते हैं। इंटरनेट में फ़ोन कंपनियाँ हमें सिर्फ़ इंटरनेट के डाटा को भेजने का काम करती है। वह कुछ भी निर्मित नहीं करती। यह भेजने का कार्य भी पहले से उपस्थित फ्रिक्वेन्सी के इस्तेमाल से होता है। मतलब उन्हें फ्रिक्वेन्सी भी तैयार मिली है। फिर उन्हें दूसरी कौन सी सुविधा पहुँचाने के अलग से पैसे चाहिए? यदि मैं वीडियो देखता हूँ तो यू ट्यूब वालों को पैसे माँगना चाहिए, फ़ोन कंपनी को किस बात के पैसे दूँगा? क्या उन्होंने यह वीडियो बनाया है?

· यदि हम केबल टीवी की भी बात करें, तो हम केबल टीवी वालों को पैसे देते हैं सिग्नल हमारे घर तक पहुँचाने के लिए। बाकी के जो पैकेज है वह उन कंपनियों के लिए हैं जो हमें अपने चेनल्स पर कार्यक्रम बना कर प्रसारित करती हैं। वह कंपनियाँ कुछ बनाती है। सिर्फ़ भेजती नहीं है।

· अब आते है फ़ोन काल्स में मूल्यों पर। यहाँ पर झोल है। यह झोल भी फ़ोन कंपनियों का ही शुरू किया हुआ है। इन फ़ोन कंपनियों ने बिना वजह हम लोगों से बहुत पैसे बनाए हैं। धीरे धीरे काल्स के मूल्य कम हुए हैं। यदि इनका बस चलता तो आज भी हम अलग अलग तरीके से पैसे दे रहे होते। जो कार्य इन्होंने मोबाइल फ़ोन के मूल्यांकन के समय किया था, वही गलत मूल्यांकन फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

दोनों पक्ष के तर्क को प्रस्तुत करने के पश्चात आप लोगों को एक और उदाहरण देना चाहूँगा, इस उदाहरण की सहायता से आप समझ पाएँगे की क्या होने वाला है।

आप अपने बच्चों के साथ एक पार्क में जाते हैं। वहाँ पर आपको अंदर जाने के लिए एक टिकट लेना पड़ता है। आप टिकट लेकर अंदर जाते है। फिर अंदर में अलग अलग हिस्से बने हुए हैं, जिन हिस्सों में अलग अलग लोगों ने अलग तरह के खेल, झूला या सवारियाँ लगाई हुई है। कुछ का इस्तेमाल करने पर कोई रोक नहीं है, एवं कुछ के लिए आपको अलग से टिकट लेना पड़ता है। परंतु आपको यह जानकार आश्चर्य होता है की आप उन हिस्सों में नहीं जा सकते। आपको अलग से टिकट लेना पड़ेगा हर हिस्से में जाने के लिए। इस टिकट को खरीदने के बाद आप उन खेलो का उपयोग कर सकते हैं, पर उन खेलों के मूल्य को भी चुका कर। यहाँ तनिक भ्रांति हो गयी है। फिर से बताता हूं।

· आपने पार्क में अंदर जाने के लिए टिकट लिया।

· आपने झूले वाले हिस्से में जाने के लिए अलग से टिकट लिया।

· अब आप झूले के पास है, झूले अलग अलग लोगों ने लगाए हैं। कुछ मुफ्त है, तो कुछ में टिकट है। आप अपनी पसंद के हिसाब से झूला लेते हैं। शायद मुफ्त वाला या फिर से एक और टिकट लेकर।

अब शायद आपको समझ आया होगा।

· पहला टिकट बेसिक इंटरनेट इस्तेमाल करने का था। जिसे हम लोग डाटा पैक भी कहते हैं।

· दूसरा टिकट वीडियो देखने का था। जिसे टेलिकॉम कंपनियाँ डालना चाहती है।

· उसके बाद आप यू ट्यूब के फ़्री वीडियो देखें या फिर ऑनलाइन मूवी देखने के लिए किसी और कंपनी की सुविधा का पैसे देकर उपयोग करे, यह आपकी मर्ज़ी है।

इसका मतलब सरल शब्दों में यह है, कि फ़ोन कंपनियों को आपके इंटरनेट इस्तेमाल के लिए पैसे चाहिए, परंतु सिर्फ़ इंटरनेट इस्तेमाल के लिए नहीं, बल्कि उसके जरिए आप जो भी सुविधा का उपयोग करें, फ़ोन कंपनी उसके लिए आपसे अलग से पैसे लेगी। यदि और सरल तरीके से समझना हो तो आप अपने घर में बिजली इस्तेमाल करने के पैसे देते हैं, पर बिजली कंपनियाँ कल आपको यह कह सकती हैं कि आप यदि बिजली का उपयोग पंखे और बत्ती के अलावा किसी और रूप में करते हैं, तो उसके लिए अलग पैसे देने पड़ेंगे। यानि फ़्रिज के लिए अलग, टीवी के लिए अलग इत्यादि। इसी प्रकार पानी पीने के लिए तो ठीक है, पर यदि आप उस पानी से शरबत बनाते हैं तो उसके लिए अलग से पैसे लेंगे। भले ही शरबत आपने अलग से खरीदा क्यों ना हो।

क्या हम इसे रोक सकते हैं?

जी हाँ। यह अभी लागू नहीं हुआ है। ट्राई ने अपने वेब साइट पर हम सभी से अपने सुझाव देने को कहा है। समस्या यह है कि उन्होंने 118 पन्ने, छोटे अक्षर में अपने वेब साइट पर डाला है। अब हम सभी से कहा जा रहा है, की उसे पढ़िए, एवं उनके 20 प्रश्नों का उत्तर दीजिए। अब पहली बात तो यह है की कोई 118 पन्ने नहीं पढ़ेगा, दूसरी बात कि बिना पढ़े आप उन 20 प्रश्नों के उत्तर कैसे दे सकते हैं। मतलब यह एक ऐसा तरीका है जिससे बहुत कम लोग इसका विरोध करेंगे, और फिर यह नियम लागू कर दिया जाएगा। जब लोग कहेंगे कि यह क्यों हुआ? तो जवाब मिलेगा कि आप लोगों ने अपनी राय ही नहीं दी।

पर कहते है ना, कि जहाँ चाह है, वही राह भी है। कुछ अच्छे लोगों ने मिलकर एक वेब साइट सेव-द-इंटरनेट बनाई है, जिसके जरिए आप ट्राई को अपने सुझाव भेज सकते हैं। यदि आपको ऊपर लिखे लेख से यह समझ में आ गया है कि जो होने जा रहा है वह गलत है, तो फिर आपको 118 पन्ने पढ़ने कि जरूरत नहीं। सुझाव को उन 20 प्रश्नों के उत्तर के रूप में रखा गया है, जिसे आप पढ़ना चाहें तो पढ़ सकते है, बदलना चाहे तो बदल सकते हैं। और फिर जब संतुष्ट हो, तो भेज सकते हैं। अब तक 3 लाख से अधिक लोगों ने अपने सुझाव भेज दिये हैं। सुझाव भेजने की आख़िरी तारीख 24 अप्रैल है। जी हाँ, आपके पास बस कुछ ही दिन है अपने विरोध को दर्ज़ कराने के लिए। इसलिए, इस लिंक - http://www.savetheinternet.in/ पर जायें, एवं ईमेल से अपने विरोध को ट्राई तक पहुँचा दे।

अंत में इस लिंक - https://youtu.be/mfY1NKrzqi0 पर दिए वीडियो को देख सकते हैं, यह भी इसी के बारे में है। और यदि आपको लगता है यह सही है, तो औरों को भी बताएं। आप चाहें तो इस लेख को उनके साथ साझा करें, या फिर गूगल पर खोजें, और भी बहुत जानकारी मिलेगी इसके बारे में।

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  #18  
Old April 16th, 2015, 09:55 PM
Jagmohan Jagmohan is offline
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Re: News or Bubble

Every Day You Might be hearing / reading about Net Neutrality?...
So what is this Net Neutrality? How It's going to impact all netizens.... with this thread I am providing some useful information and necessary action expecting from all of you...and therefore I have open this thread in NHB.


What is Net Neutrality?
Net Neutrality is the Internet’s guiding principle: It preserves our right to communicate freely online. This is the definition of an open Internet.

Net Neutrality means an Internet that enables and protects free speech. It means that Internet service providers should provide us with open networks — and should not block or discriminate against any applications or content that ride over those networks. Just as your phone company shouldn't decide who you can call and what you say on that call, your ISP shouldn't be concerned with the content you view or post online.

Without Net Neutrality, cable and phone companies could carve the Internet into fast and slow lanes. An ISP could slow down its competitors' content or block political opinions it disagreed with. ISPs could charge extra fees to the few content companies that could afford to pay for preferential treatment — relegating everyone else to a slower tier of service. This would destroy the open Internet.


आप लोगों ने यह शब्द कई जगह पढ़ा या सुना होगा। आजकल भारत में यह शब्द सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। अर्थात ट्रेंडिंग कर रहा है। लोग इसके बारे में फेसबुक या ट्विटर पर पोस्ट कर रहे हैं। हमारी ट्राई ने भी अपने वेब साइट पर लोगों से सलाह माँगी है। अँग्रेज़ी में बहुत लेख मिल जाएँगे इसके बारे में। सोचा क्यों न हिंदी पढ़ने वाले लोगों के लिए साधारण भाषा में इसकी व्याख्या कर दी जाये। शायद यह जानकारी आपके लिए उपयोगी हो।

एक खुला या मुक्त इंटरनेट पूरी दुनिया में अभूतपूर्व रचनात्मकता, नवाचार, ज्ञान लाभ और विभिन्न प्रकार के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक अवसरों का कारण बना हे।

आज, इस खुले या मुक्त इंटरनेट को शक्तिशाली नेटवर्क प्रदाताओं से बहुत बड़ा खतरा उठ खड़ा हुआ है, जो इस बात के द्वारपाल बनना चाहते हैं कि उपभोकता इंटरनेट के विभिन्न हिस्सों का उपयोग केसे करते हैं। हम उनके नेटवर्क का प्रबंधन करने के लिए उचित और आवश्यक विधियों का उपयोग करने से इन कंपनियों को रोकना नही चाहते, लेकिन यह गतिविधियों इंटरनेट के खुलेपन को समाप्त करने या इंटरनेट सेंसरशिप का बहाना नहीं बन सकती।

इस इरादे के साथ कि इंटरनेट का मौलिक खुलापन संरक्षित रखा जाना चाहिए, हम इस वेबसाइट के संसाधन विभिन्न कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकीविदों को प्रस्तुत करते है।

नेट निष्पक्षता
नेट निष्पक्षता की यह आवश्यकता है की इंटरनेट का बुनियादी ढांचा खुला और मुक्त रहना चहिये, अौर नेटवर्क प्रदाता हर एक जानकारी, अनुप्रयोग, और सेवा को, बिना कोई भेद-भाव किये, बिल्कुल सामान तौर
पर प्रदान करें
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  #19  
Old April 16th, 2015, 09:57 PM
Jagmohan Jagmohan is offline
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Re: News or Bubble

Every Day You Might be hearing / reading about Net Neutrality?...
So what is this Net Neutrality? How It's going to impact all netizens.... with this thread I am providing some useful information and necessary action expecting from all of you...


Net Neutrality is crucial for small business owners, startups and entrepreneurs, who rely on the open Internet to launch their businesses, create a market, advertise their products and services, and distribute products to customers. We need the open Internet to foster job growth, competition and innovation.

Net Neutrality lowers the barriers of entry for entrepreneurs, startups and small businesses by ensuring the Web is a fair and level playing field. It’s because of Net Neutrality that small businesses and entrepreneurs have been able to thrive on the Internet. They use the Internet to reach new customers and showcase their goods, applications and services.

No company should be able to interfere with this open marketplace. ISPs are by definition the gatekeepers to the Internet, and without Net Neutrality, they would seize every possible opportunity to profit from that gatekeeper control.
Without Net Neutrality, the next Google would never get off the ground.


What is Net Neutrality?
Net Neutrality is the Internet’s guiding principle: It preserves our right to communicate freely online. This is the definition of an open Internet.

Net Neutrality means an Internet that enables and protects free speech. It means that Internet service providers should provide us with open networks — and should not block or discriminate against any applications or content that ride over those networks. Just as your phone company shouldn't decide who you can call and what you say on that call, your ISP shouldn't be concerned with the content you view or post online.

Without Net Neutrality, cable and phone companies could carve the Internet into fast and slow lanes. An ISP could slow down its competitors' content or block political opinions it disagreed with. ISPs could charge extra fees to the few content companies that could afford to pay for preferential treatment — relegating everyone else to a slower tier of service. This would destroy the open Internet.


आप लोगों ने यह शब्द कई जगह पढ़ा या सुना होगा। आजकल भारत में यह शब्द सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। अर्थात ट्रेंडिंग कर रहा है। लोग इसके बारे में फेसबुक या ट्विटर पर पोस्ट कर रहे हैं। हमारी ट्राई ने भी अपने वेब साइट पर लोगों से सलाह माँगी है। अँग्रेज़ी में बहुत लेख मिल जाएँगे इसके बारे में। सोचा क्यों न हिंदी पढ़ने वाले लोगों के लिए साधारण भाषा में इसकी व्याख्या कर दी जाये। शायद यह जानकारी आपके लिए उपयोगी हो।

एक खुला या मुक्त इंटरनेट पूरी दुनिया में अभूतपूर्व रचनात्मकता, नवाचार, ज्ञान लाभ और विभिन्न प्रकार के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक अवसरों का कारण बना हे।

आज, इस खुले या मुक्त इंटरनेट को शक्तिशाली नेटवर्क प्रदाताओं से बहुत बड़ा खतरा उठ खड़ा हुआ है, जो इस बात के द्वारपाल बनना चाहते हैं कि उपभोकता इंटरनेट के विभिन्न हिस्सों का उपयोग केसे करते हैं। हम उनके नेटवर्क का प्रबंधन करने के लिए उचित और आवश्यक विधियों का उपयोग करने से इन कंपनियों को रोकना नही चाहते, लेकिन यह गतिविधियों इंटरनेट के खुलेपन को समाप्त करने या इंटरनेट सेंसरशिप का बहाना नहीं बन सकती।

इस इरादे के साथ कि इंटरनेट का मौलिक खुलापन संरक्षित रखा जाना चाहिए, हम इस वेबसाइट के संसाधन विभिन्न कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकीविदों को प्रस्तुत करते है।

नेट निष्पक्षता
नेट निष्पक्षता की यह आवश्यकता है की इंटरनेट का बुनियादी ढांचा खुला और मुक्त रहना चहिये, अौर नेटवर्क प्रदाता हर एक जानकारी, अनुप्रयोग, और सेवा को, बिना कोई भेद-भाव किये, बिल्कुल सामान तौर
पर प्रदान करें

hahahaahah .

Net neutrality Ad - Save the internet,. !!

This is how you will be Paying for your Internet If you dont Act Right Now - Save The Internet - YouTube



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Last edited by Jagmohan; April 16th, 2015 at 10:44 PM.
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  #20  
Old April 18th, 2015, 07:25 AM
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Re: News or Bubble

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  #21  
Old April 18th, 2015, 07:41 AM
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Re: News or Bubble

One thing which keeps making the headlines in US is the Keystone Pipeline. i dont know why democrats are opposing it, but republicans call it some kind of an economic savior. So, what is about it?
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  #22  
Old April 20th, 2015, 01:42 AM
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Re: News or Bubble

Here is what Airtel has to say on this issue :

Quote:
Dear Customer

Over the last few days you may have seen a lot of conversation on our toll free platform Airtel Zero. It has been painted as a move that violates net neutrality and we have been very concerned at the incorrect information that has been carried by some quarters in the media as well as in social media. I wanted to take this opportunity to clear the air and reiterate that we are completely committed to net neutrality. Let me clarify.
  1. Our vision is to have every Indian on the internet. There are millions of Indians who think that the internet is expensive and do not know what it can do for them. We believe that every Indian has the right to be on the internet. We know that if we allow them to experience the joys of the internet they will join the digital revolution.
  2. Airtel Zero is a technology platform that connects application providers to their customers for free. The platform allows any content or application provider to enroll on it so that their customers can visit these sites for free. Instead of charging customers we charge the providers who choose to get on to the platform.
  3. Our platform is open to all application developers, content providers and internet sites on an equal basis. The same rate card is offered to all these providers on a totally non discriminatory basis.
  4. There is no difference between this and toll free voice such as 1-800. When a company selling an insurance product enrols into the toll free voice platform, customers who call the number are not charged but when they call a normal number they are charged. Calls are not blocked or given preferential treatment else our whole business would be jeopardized. Toll free voice helps the business owner engage with their customer. At the same time it provides the customer the benefit of reaching the business for free. Toll free voice is not a product or a tariff plan, it is merely a technology platform. We are simply taking the same concept of toll free voice to the world of data. As a result it is for the application developer and their customer to decide how data charges will be paid for. If the application developer is on the platform they pay for the data and their customer does not. If the developer is not on the platform the customer pays for data as they do now. Companies are free to choose whether they want to be on the platform or not. This does not change access to the content in any way whatsoever. Customers are free to choose which web site they want to visit, whether it is toll free or not. If they visit a toll free site they are not charged for data. If they visit any other site normal data charges apply.
  5. Finally every web site, content or application will always be given the same treatment on our network whether they are on the toll free platform or not. As a company we do not ever block, throttle or provide any differential speeds to any web site. We have never done it and will never do it. We believe customers are the reason we are in business. As a result we will always do what is right for our customers.
There has been a deliberate effort by some quarters to confuse people that we will offer differential speeds or differential access for different sites. This is untrue. After all we earn revenues from data. If there are more customers who are on the Internet the better it is for our business. Our revenues are not dependent on which sites they visit because we charge on the basis of consumption of mega bytes not which site they visited.

In sum our platform is a technology platform and is open to all application developers and their customers. Our platform only provides a choice of how the data that is consumed is paid for by any of the two - the application provider or their customer. Whether any application provider enrolls on the platform or not is entirely their choice. All we have is a technology. We do not have a product or tariff plan that we have launched. We simply have a platform. And every application developer and their customer is free to choose in an entirely neutral way what they want to do.

In conclusion, we stand fully committed to net neutrality to ensure the goals of the Prime Minister`s vision of digital India are met.
Regards,
Gopal Vittal
MD & CEO
Bharti Airtel Ltd.
India & South Asia
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  #23  
Old April 23rd, 2015, 05:01 AM
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Re: News or Bubble

It is deja vu. i was getting similar emails 5 years back saying that Lokpal would rid India of corruption. Now, got an email from a "telecom watchdog operational since 1999" asking to sign some online petition for this Net Neutrality. Now, i have not heard of these guys in last 16 years. And its wasy to connect the dots, but i was also getting emails from Congress on the same ID. And now that Pappu has also spoken, it is clear as to who is t=driving this news piece.
__________________
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  #24  
Old April 23rd, 2015, 05:02 AM
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Re: News or Bubble

Quote:
Originally Posted by khaski_khopari View Post
Here is what Airtel has to say on this issue :
So, finally we hear the other side.
__________________
This is quite a game, politics. There are no permanent enemies, and no permanent friends,only permanent interests. - Some Firang
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  #25  
Old April 24th, 2015, 03:14 AM
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Re: News or Bubble

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Originally Posted by sgars View Post
So, finally we hear the other side.
I think that it is just not practically possible to discriminate speed of internet - this rumor of providing better speed to one website and hualting the other in order to encourage user to some particular website is non sense. Corporates would never play such childish games. If they ever provided sub standard speed than the contractual one, then they are likely to face multi billion law suits.

Companies like Google and Facebook are already facing such charges for allegedly trying to gain monopoly on internet. Minnows like Airtel and Co can not afford to take this risk; the amount that they have to pay as penalty would be much bigger than they can even collect from their handful favored clients ...

So, at best they might provide better (than normal) speed to certain websites, there should be no problem in it provided the remaining websites still receive the standard contractual speed and the user does not observes 'slow internet' while normal browsing - beacuse if that happens then the ISP will be in big trouble...
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  #26  
Old April 24th, 2015, 04:14 AM
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Re: News or Bubble

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Corporates would never play such childish games
Same Corporates do these :

- Silently deducting small amount in prepaid balance now and then in the name of other services which you have never subscribed. I personally had this experience. So many others too.

- Frequent call dropping : You are being charged for full minute. But they incur cost based on seconds only. so every time there is call drop, they earn that much. And you know this happens very frequent. We don't care for such small thing, but it sums up to a good revenue for the such corporates.

- You pay for 3G services. But you never notice many times in a day, it is only 2G connection active.

Another Service :

They hire 3rd party agencies and provide services like phone friendship, voice chat where you can talk any stuff while keeping your identity hidden. These agencies have call center where they have hired females who do all sort of sex/open chat. No language bar. Corporate charge Rs. 3-4 for each minutes of such call and earn huge money. Tharkies despos are everywhere.

There are many other childish games which they play.
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  #27  
Old April 24th, 2015, 07:11 AM
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Re: News or Bubble

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Originally Posted by khaski_khopari View Post
I think that it is just not practically possible to discriminate speed of internet - this rumor of providing better speed to one website and hualting the other in order to encourage user to some particular website is non sense. Corporates would never play such childish games. If they ever provided sub standard speed than the contractual one, then they are likely to face multi billion law suits.

Companies like Google and Facebook are already facing such charges for allegedly trying to gain monopoly on internet. Minnows like Airtel and Co can not afford to take this risk; the amount that they have to pay as penalty would be much bigger than they can even collect from their handful favored clients ...

So, at best they might provide better (than normal) speed to certain websites, there should be no problem in it provided the remaining websites still receive the standard contractual speed and the user does not observes 'slow internet' while normal browsing - beacuse if that happens then the ISP will be in big trouble...
It works that way in US, not in India.

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Originally Posted by ungalprasad View Post
Same Corporates do these :

- Silently deducting small amount in prepaid balance now and then in the name of other services which you have never subscribed. I personally had this experience. So many others too.

- Frequent call dropping : You are being charged for full minute. But they incur cost based on seconds only. so every time there is call drop, they earn that much. And you know this happens very frequent. We don't care for such small thing, but it sums up to a good revenue for the such corporates.

- You pay for 3G services. But you never notice many times in a day, it is only 2G connection active.

Another Service :

They hire 3rd party agencies and provide services like phone friendship, voice chat where you can talk any stuff while keeping your identity hidden. These agencies have call center where they have hired females who do all sort of sex/open chat. No language bar. Corporate charge Rs. 3-4 for each minutes of such call and earn huge money. Tharkies despos are everywhere.

There are many other childish games which they play.
Now, the co's are there to make profit. Their visible high volume call rates probably offer very thin margins. So they have to look for 'other means'. The fair means are VAS like Caller tone and jokes (stupid jokes at 6 rupees a minute was i found in 2002) The first complaint is a straight 2 number ka kaam. If you have solid evidence, you could actually approach a consumer court. But you would end up spending a lot of time. Here, there are 16 operators and reputation might be involved. Like my perception is that Tata Docomo would be less Do numberi than Reliance.
For call dropping, dont some cell cos charge by the second. The cell co's would always have some excuse.

Now, the most interesting one.
The sex chat was there long before mobiles came. in 98 or 99, Sushma Swaraj found out that a lot were using government office phones for such services and blocked these at least for government phones.
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  #28  
Old April 24th, 2015, 07:13 AM
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Re: News or Bubble

Now, the latest promoted Head line seems to be Pappu's Kedarnath yatra.
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  #29  
Old April 24th, 2015, 07:22 AM
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Re: News or Bubble

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Originally Posted by sgars View Post
Now, the latest promoted Head line seems to be Pappu's Kedarnath yatra.
He's so fit very few leaders (really???) can trek to Kedarnath. Apparently RaGa said he runs 15 kms everyday.. no work to do.. and may be meant his car runs 15 kms in Lutyens.

Rahul Gandhi visits Kedarnath temple.
Rahul Gandhi a year back - "Jo mandir jaate hain, woh ladkiyaan ko....."
Baaki aap log samjhdaar hai!

This bugger is getting orgasms..

Last edited by sarv_shaktimaan; April 24th, 2015 at 07:48 AM.
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  #30  
Old April 24th, 2015, 08:14 AM
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Re: News or Bubble

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Originally Posted by sarv_shaktimaan View Post
RaGa just came back from guess where.. Bangkok.



Subah ka bhoolaa shaam ko ghar laut aaye toh use bhoola nhain kahte !
Hope, he must had a very happy bang bang time in Bangcock and as the name suggests, he must had happy strokes with that bangcocky gf , daughter of a rich billionaire !


Last edited by Jagmohan; April 24th, 2015 at 08:17 AM.
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